राजधानी रायपुर के डब्लूआरएस कॉलोनी में 2 मई से चल रहे शोलापुरी पूजा महोत्सव का आज समापन होगा। शनिवार को माता के दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। रविवार दोपहर 12 बजे देवी को 221 किलो व्यंजन का भोग अर्पित किया जाएगा। महाभोग के बाद प्रसाद वितरण होगा। श्री श्री शोलापुरी माता पूजा समिति के अध्यक्ष बी.श्रीनिवास राव ने बताया कि यह आयोजन पिछले 53 सालों से हो रहा। इस बार कॉलोनी में अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल बनाया गया। जिसकी भव्यता देखने और पूजा उत्सव में शामिल होने रोजाना श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ रहा है। वही आज शाम माता को विदाई दी जाएगी। ससुराल से मायके आती है देवी श्री श्री शोलापुरी माता पूजा समिति के अध्यक्ष बी. श्रीनिवास राव ने बताया कि माता का मंदिर केन्द्रीय विद्यालय के पास है। माता को ससुराल रूपी मंदिर से पालकी में विराजित कर कुछ दूरी पर कालोनी में मायके रूपी पंडाल में लाया जाता है। जिस तरह मायके में बेटी की आवभगत की जाती है, उसी तरह माता का स्वागत सत्कार करने की परंपरा निभाई जाती है। माता शोलापुरी का 9 दिनों तक अलग-अलग रूपों में श्रृंगार करके महाआरती की जाती है और रोजाना 22 प्रकार के भोग लगाए जाते है। 50 सालों से पुराना शोलापुरी माता महोत्सव समिति के लोगों ने बताया कि इस आयोजन का 53 वां साल है। पिछले 50 सालों के इसे धूमधाम से मनाया जा रहा है। सबसे पहले इस पूजा पद्धति को खडगपुर से लाया गया था। हर साल बड़े धूम धाम से यह आयोजन किया जाता है। जिसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंचते है। आंध्रप्रदेश और खड़गपुर के ढोल, डफली से होती है आरती समिति के लोगों ने बताया कि 9 दिवसीय इस महोत्सव में आंध्र प्रदेश और खड़कपुर के ढोल डफली से रोजाना माता की आरती होती है। इस महोत्सव के लिए हर साल 8 से 10 कलाकार आंध्र प्रदेश और खड़गपुर से बुलवाए जाते हैं। शोभायात्रा निकालकर धूमधाम से माता की होगी विदाई आज 9 दिवसीय शोलापुरी माता पूजा उत्सव का समापन हो जाएगा। शोभायात्रा के साथ होगी माता की विदाई होगी। अध्यक्ष ने बताया आगमन की तरह ही शोभायात्रा निकालकर धूमधाम से माता को विदा किया जाएगा। मान्यता है कि माता विदा होकर वापस नगर के बाहर मंदिर में विराजेंगी। वहां से भी वो हमेशा महामारी और बीमारियों से लोगों की रक्षा करती हैं।


