श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी, और किया पूजन अर्चन
सोमवती अमावस्या पर महिलाओं ने की परिक्रमा
अमरकंटक। प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थल पावन पवित्र नगरी अमरकंटक में आज पौषी अमावस्या पौष मास की सोमवती अमावस्या के शुभ एवं पावन अवसर पर सौभाग्यवती सुहागिन महिलाओं ने आज अपने पति पुत्रों संतान तथा परिवार एवं समाज के सुदीर्घ यशस्वी मंगलमय स्वस्थ जीवन की कामना के लिए पीपल के वृक्ष की अपनी शक्ति सामर्थ्य के अनुसार फेरी परिक्रमा लगाई। सौभाग्यवती एवं सुहागिन महिलाओं द्वारा नर्मदा उद्गम स्थल परिसर के सामने तथा अन्य स्थलों पर भगवान विष्णु के प्रतीक वासुदेव पीपल वृक्ष का प्रदक्षिणा यथा सामग्री के साथ मनोकामना पूर्ति हेतु सुबह से ही किए जाने का क्रम शुरू हो गया था जो देर शाम तक निरंतर चलता रहा। महिलाओं ने 108 फेरी अपने शक्ति सामर्थ्य के सामग्री के साथ यह प्रदक्षिणा करते रहे। पंडित राजेश पाठक ने बताया कि सोमवती अमावस्या के शुभ पावन अवसर पर महिलाओं के द्वारा पीपल वृक्ष का प्रशिक्षण किया जाना उनके मन वांछित मनोकामना की पूर्ति करता है तथा पति संतान तथा परिवार समाज के सुख समृद्धि यशस्वी एवं लंबे जीवन की कामना प्रदान करता है यह वर्ष में दो-तीन ही बार आता है सोमवती अमावस्या अति शुभ फलदाई है और खासकर पौष मास की अमावस्या तो अति उत्तम श्रेष्ठ है सभी मनोकामना पूर्ति करता है। पौष मास की सोमवती अमावस्या के पावन शुभ अवसर पर बाहर से आए हजारों की तादाद में भक्त श्रद्धालुओं तीर्थ यात्रियों ने पावन सलिल मां नर्मदा जी के रामघाट पुष्कर तट तथा अरंडी संगम नर्मदा तट में पुण्य डुबकी लगाई स्नान दर्शन पूजन अर्चन अभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया तथा नर्मदा मंदिर में लाइन लगकर दर्शन लाभ लिया आज अमरकंटक में हजारों की संख्या में महिलाएं पुरुष आए हुए थे रामघाट तक कोटि तीर्थ गांधी कुंड में भारी भीड़ भाड़ रही। सुरक्षा व्यवस्था हेतु पुलिस बल भी सभी यथा स्थलों पर चाक चैबंद रह कर तैनात रहे। अमरकंटक में इन दिनों छुट्टियां रहने के चलते भारी भीड़ भाड़ हो रही है। सोमवती अमावस्या के दिन सुबह से कोतमा नगर में महिलाओं के द्वारा पीपल एवं तुलसी की पूजा करते हुए 108 फेरी लगाते हुए अपने परिवार की रक्षा एवं खुशहाली की कामना किया। सुबह से ही महिलाओं के द्वारा नगर के धर्मशाला मंदिर,आजाद चैक पीपल मंदिर, पंचायती मंदिर, ठाकुर बाबा धाम,गोहांड्रा मंदिर सहित आसपास के अन्य जगहों में महिलाओं की भीड़ बनी रही। महिलाओं के द्वारा सुहागन सामग्री को अर्पित कर विधि विधान से पूजा की एवं ऋतु फल सहित अन्य सामग्रियों का फेरी लगाते हुए आपस में सुहागन सामग्री का आदान-प्रदान किया। फेरी लगाने के बाद वृक्ष के नीचे ही सुहागन की कथा भी सुनी गई त्योहार को लेकर महिलाओं में उत्साह देखा गया।


