हनुमानगढ़ में भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के सदस्यों ने गुरुवार को श्रम कानूनों में हुए बदलावों के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा, जिसमें 4 लेबर कोड और श्रम शक्ति नीति-2025 को वापस लेने की मांग की गई। सीटू सदस्यों का आरोप है कि ये नीतियां मजदूरों के अधिकारों का हनन कर पूंजीपतियों के हितों को साधने वाली हैं। संगठन कार्यकर्ताओं ने शहीद भगत सिंह चौक स्थित कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। वक्ताओं ने कहा कि नई श्रम संहिताओं के कारण तय समय पर वेतन, स्थायी नौकरी और सुरक्षा जैसे मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए हैं। ठेका और आउटसोर्सिंग को बढ़ावा मिलने से बड़ी संख्या में मजदूर स्थायी रोजगार के दायरे से बाहर धकेले जा रहे हैं। श्रम शक्ति नीति-2025 को मजदूर-विरोधी बताया
राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सरकार ने 2019-20 में संसद से पारित कई पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 2025 में 4 नए कोड लागू किए हैं। इन कोड्स में मालिकों पर निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था को ढीला कर दिया गया है। सीटू नेताओं के अनुसार, निरीक्षण प्रणाली कमजोर होने से फैक्ट्रियों में दुर्घटनाएं, ओवरटाइम का शोषण और कम वेतन के मामले बढ़ने की आशंका है।
श्रम शक्ति नीति-2025 को भी मजदूर-विरोधी बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस नीति के नाम पर मजदूरों के अधिकार कम किए जा रहे हैं। इसके साथ ही निजीकरण और सार्वजनिक उपक्रमों के निगमकरण को भी तेज किया जा रहा है। सीटू का मानना है कि इससे रेलवे, ऊर्जा और अन्य राष्ट्रीय संपत्तियां कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में जा सकती हैं।
सीटू ने केंद्र सरकार से चारों लेबर कोड और श्रम शक्ति नीति-2025 को रद्द करने की मांग की है। संगठन ने पुराने श्रम कानूनों के तहत मजदूरों को मिलने वाली सुरक्षा और सामाजिक लाभों को बहाल करने की भी मांग की। चेतावनी दी गई है कि मांगें नहीं माने जाने पर प्रदेशभर के मजदूर आंदोलन तेज करेंगे।


