श्रीगंगानगर शहर के प्रिंस सेठ ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 313वीं रैंक हासिल की है। चार साल के कठिन संघर्ष के बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने सफलता का परचम लहराया। प्रिंस ने अपनी तैयारी को बेहद अनुशासित और फोकस्ड रखा। प्रिंस ने कहा- उनके पूरा कॉन्फिडेंस था कि वे यूपीएससी क्रेक कर लेंगे। लेकिन रिजल्ट आने के बाद तीन-चार बार रोल नम्बर चेक किए ताकि सही पता चला सके। उन्होंने कहा- स्टडी करते समय दोस्तों से संपर्क रखे और स्टडी में अकेले नहीं पड़ जाए। उन्होंने सिर्फ 14 मेन सब्जेक्ट्स की 14 किताबें चुनीं और इन्हें 13-13 बार शुरू से अंत तक पढ़ा। पहले दो अटेम्प्ट में असफलता मिली, मगर हार नहीं मानी। तीसरे प्रयास में सीधे सफलता के शिखर पर पहुंच गए। प्रिंस का पर्सनल इंटरव्यू दिसंबर में हुआ, जो करीब 25 मिनट चला। इस दौरान उनसे ठीक 25 सवाल पूछे गए। एक पेचीदा सवाल उनके गृह जिले से जुड़ा था। पूछा गया कि यदि आपको विकल्प दिया जाए, तो आप श्रीगंगानगर जिले को राजस्थान में रखना चाहेंगे या पंजाब में, आपकी पहली प्राथमिकता क्या होगी। प्रिंस ने बेहद तर्कसंगत और भावनात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि श्रीगंगानगर का इतिहास और पहचान महाराजा गंगासिंह से जुड़ी है, जिन्होंने इस शहर की स्थापना की और गंगनहर लाकर इसे राजस्थान का ‘धान का कटोरा’ बनाया। इस ऐतिहासिक योगदान के कारण उनकी पहली प्राथमिकता हमेशा राजस्थान रहेगी। प्रिंस में IIT-JAM 2021 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की थी और IIT बॉम्बे से MSc (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल की। प्रिंस की सफलता का सबसे बड़ा राज उनका अनुशासन और सेल्फ-स्टडी रहा। प्रिंस के पिता जसपाल सेठी और माता मनजीत कौर बताते हैं- बेटे की यह उपलब्धि पूरे परिवार और समाज के लिए गर्व का विषय है। प्रिंस की मेहनत और लगन ने साबित कर दिया कि सपने कितने भी बड़े हों, सही दिशा और निरंतर प्रयास से उन्हें हासिल किया जा सकता है।


