श्रीगंगानगर की टांटिया यूनिवर्सिटी का कैंपस उस समय तालियों से गूंज उठा, जब अलग-अलग रंग, आकार और स्वभाव के 150 से ज्यादा नस्लों के डॉग्स ने रैंप पर एंट्री की। ‘फैकल्टी ऑफ वेटरनरी साइंस’ और टांटिया काऊ फार्म की ओर से आयोजित इस डॉग शो में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ सहित कई राज्यों से प्रतिभागी पहुंचे। दिल्ली से आए विशेषज्ञों ने कुत्तों की नस्लों, उनकी देखभाल और ट्रेनिंग के बारे में आसान भाषा में जानकारी दी। रैंप पर दिखा रॉयल अंदाज जर्मन शेफर्ड की शान, लैब्राडोर की सादगी, पोमेरियन की फुर्ती और पग की प्यारी अदाएं लोगों का दिल जीतती रहीं।
रॉटवीलर और डाबरमैन जैसे ताकतवर और सतर्क डॉग्स ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। अमेरिकन बुली, पाकिस्तानी बुली, बीगल, बकरवाल, इंडी, चौ चौ, शिट्जू और कई अन्य नस्लों ने रैंप वॉक में हिस्सा लिया। कुछ डॉग्स ने फैंसी ड्रेस पहनकर दर्शकों को हैरान कर दिया। पाकिस्तानी पिटबुल: ताकतवर कद-काठी और खास डाइट शो में सबसे ज्यादा चर्चा पाकिस्तानी पिटबुल की रही। इसे बेहद फुर्तीला, ताकतवर और भारी शरीर वाला डॉग माना जाता है। यह 28-44 इंच तक ऊंचे और 70-91 किलो से अधिक वजन वाले होते हैं। मजबूत जबड़े और मांसल शरीर इसकी खास पहचान हैं। इन्हें गार्ड डॉग के रूप में घरों की सुरक्षा के लिए पसंद किया जाता है। हालांकि विशेषज्ञों ने साफ कहा कि किसी भी डॉग का व्यवहार उसकी ट्रेनिंग और माहौल पर निर्भर करता है। सही देखभाल और अनुशासन में रखा जाए तो यह अपने मालिक के प्रति वफादार रहता है। कैसी होती है इसकी डाइट? इतने भारी और एक्टिव डॉग को ज्यादा पोषण की जरूरत होती है। इसे दिन में दो बार खाना दिया जाता है। एक दिन की डाइट में शामिल हो सकता है: विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे बड़े और ताकतवर डॉग को रखने से पहले उसकी ट्रेनिंग, खुली जगह, नियमित एक्सरसाइज और जिम्मेदार देखभाल जरूरी है। सबसे चालाक नस्ल: डाबरमैन डाबरमैन को दुनिया की सबसे सतर्क और समझदार नस्लों में गिना जाता है। यह अपनी तेज रफ्तार, फुर्ती और मजबूत शरीर के लिए जाना जाता है। लंबा कद, चमकदार कोट और चौकन्नी नजर इसकी खास पहचान है। डाबरमैन अपने मालिक के प्रति बेहद वफादार होता है। सही ट्रेनिंग मिलने पर यह घर और परिवार की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि इसे गार्ड डॉग के रूप में भी पसंद किया जाता है। यह नस्ल बहुत एक्टिव होती है, इसलिए इसे रोजाना खुली जगह, दौड़ और नियमित एक्सरसाइज की जरूरत होती है। पर्याप्त गतिविधि और अनुशासन के साथ डाबरमैन न सिर्फ बहादुर बल्कि एक समझदार और आज्ञाकारी साथी साबित होता है। प्रतियोगिताओं में दिखा जोश फैकल्टी ऑफ वेटरनरी के डीन डॉ. आरपीएस बघेल ने बताया कि कार्यक्रम में बेस्ट ब्रीड अवॉर्ड, डॉग रैंप वॉक, फैंसी ड्रेस कॉम्पिटिशन और ग्रूमिंग चैलेंज जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विजेता डॉग्स को ट्रॉफी, पुरस्कार और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया। स्टूडेंट्स खासतौर पर डॉग्स की कमांड फॉलो करने की कला और ट्रेनिंग देखकर उत्साहित नजर आए। मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं भी रहीं खास फैकल्टी के डीन डॉ. आरपीएस बघेल कि शो में सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि जागरूकता पर भी जोर दिया गया। फ्री हेल्थ चेकअप, फ्री वैक्सीनेशन और पेट पैरेंटिंग काउंसलिंग की सुविधा दी गई। आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जिम्मेदार पेट केयर और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास है। रंग-बिरंगे कॉलर, स्टाइलिश चाल और मालिकों के साथ शानदार तालमेल ने इस डॉग शो को श्रीगंगानगर का यादगार आयोजन बना दिया। काऊ फार्म प्रबंधक नरेंद्र गिरी ने कहा कि डॉग शो का मकसद लोगों को जिम्मेदार पेट केयर के लिए प्रेरित करना है। रंग-बिरंगे कॉलर, स्टाइलिश चाल और मालिकों के साथ तालमेल ने इस डॉग शो को श्रीगंगानगर का यादगार आयोजन बना दिया। इन नस्लों के कुत्ते डॉग शो में आए जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर, पोमेरियन, पग, रॉटवीलर, बुलडॉग, टॉय पॉम, शिट्जू, अमेरिकन बुली, पाकिस्तानी बुली, देशी हाउंड, बीगल, बकरवाल, इंडी, बीचॉन,, प्वाइंटर, चौ चौ व डाबरमैन जैसी 20+ नस्लें रैंप पर छा गईं।


