भास्कर न्यूज |गिरिडीह आम बागान सिहोडीह के चौधरी मुहल्ला स्थित स्तुति वैंकेट हॉल में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक प्रशांत मुकुट प्रभु जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कथा भगवान विष्णु के भक्त राजा परीक्षित को शुकदेव ने सुनाई गई थी। यह कथा सुनने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं, मन शांत होता है, और भगवान के प्रति भक्ति बढ़ती है। श्रीमद् भागवत कथा सुनने से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है और वह भगवान के करीब महसूस करता है। श्रीमद् भागवत कथा सुनने से जीवन में सफलता मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। मन शुद्ध होता है और सांसारिक मोह-माया से दूर होने में मदद मिलती है। सुनने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, अर्थात व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। व्यक्ति को पुण्य फल प्राप्त होता है, और उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। परम लक्ष्य की प्राप्ति होती है, अर्थात भगवान की भक्ति और ज्ञान प्राप्त करना। कलियुग में भगवान का स्मरण ही भवसागर से पार जाने का एकमात्र आधार है, और श्रीमद् भागवत कथा भगवान का स्मरण करने का एक उत्तम साधन है। जहां भागवत कथा होती है, वहां का वातावरण सकारात्मक हो जाता है और दुष्ट प्रवृत्तियां नष्ट हो जाती हैं। श्रीमद् भागवत कथा जीवन के उद्देश्य और दिशा को दर्शाती है, और व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने में मदद करती है। श्रीमद् भागवत कथा एक महान ग्रंथ है जो हमें भगवान के करीब लाता है, हमारे जीवन को सार्थक बनाता है, और मोक्ष का मार्ग दिखाता है। मौके पर कथा के आयोजन कर्ता अजय बगेडिया व संगीता बगेडिया सहित श्रोता मौजूद थे।


