जांजगीर | मां रक्त मौली की पावन धरा पर श्रीमद् देवी भागवत पुराण का आयोजन हो रहा है। कथा वाचिका आकृति तिवारी ने श्रद्धा और भाव से कथा का वर्णन किया। उन्होंने देवी महात्म्य, शक्ति की महिमा और भक्तों के कल्याण की कथाएं विस्तार से सुनाईं। कहा, ऐसे आयोजनों से आध्यात्मिक वातावरण बनता है। समाज में धर्म और संस्कृति की जड़ें मजबूत होती हैं। कथा के पहले दिन देवी की आरती, कलश स्थापना और गणपति वंदना की गई। आकृति तिवारी ने बताया कि देवी भागवत पुराण के पहले दिन सृष्टि की उत्पत्ति और देवी शक्ति की महिमा का वर्णन होता है। नेमिषारण्य में शौनक ऋषि ने सूत जी से पूछा कि कलियुग में भक्तों का उद्धार कैसे होगा। सूत जी ने देवी भागवत पुराण के महत्व को बताया। उन्होंने कहा, देवी भगवती ही संपूर्ण सृष्टि की मूल कारण हैं। उन्हीं से ब्रह्मा, विष्णु और महेश की उत्पत्ति हुई। जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे, तब मधु और कैटभ नाम के दो राक्षस उत्पन्न हुए। देवी महामाया की कृपा से विष्णु जी ने उनका संहार किया। उन्होंने बताया कि देवी भागवत पुराण में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। देवी की कृपा से भक्त को सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। कथा का पहला दिन यह सिखाता है कि माँ शक्ति ही संपूर्ण जगत की मूल कारण हैं। उनकी कृपा से ही संसार में कल्याण संभव है। भक्त को सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से मां की आराधना करनी चाहिए। तभी मोक्ष और सुख की प्राप्ति होती है।


