प्रसिद्ध सिख प्रचारक रणजीत सिंह ढडरियां वाले ने श्री अकाल तख्त साहिब से माफी प्राप्त करने के बाद अपना पहला सार्वजनिक बयान जारी किया है। उन्होंने आत्मचिंतन, मन पर नियंत्रण, और संगत को एकजुट करने की अपील के साथ गहराई से आत्म-विश्लेषण किया है। उन्होंने अपने समर्थकों व लोगों को अपने मन से बातें ना बनाने की सलाह भी दी और कहा कि सिर्फ वही जानते हैं, उनके मन में क्या है। रणजीत सिंह ढडरियां वाले ने कहा कि वह श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश हुए। किसी ने कहा- अच्छा काम हुआ। 90 फीसदी संगत ने इस काम को अच्छा माना। लेकिन देखते हैं कि कोई अपने कारण बताने लगे, जितने मुंह उतनी बातें बनीं। किसी ने कहा कि क्या जरूरत थी श्री अकाल तख्त साहिब पर जाने की। लेकिन, जब वह श्री अकाल तख्त साहिब के सामने खड़े थे, तो वह उस स्थान पर खड़े थे, जिसे हर सिख मानता है। उनका कहना है कि अगर वह श्री अकाल तख्त साहिब के सामने खड़ा हैं तो इसका मतलब वह सभी सिखों के सामने खड़े हैं। ज्ञानी गड़गज के बयान के बाद मन बदला रणजीत सिंह ढडरियां वाले ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी के कहने पर कुछ नहीं किया। जब पहले आदेश हुए, तब भी जो उनके मन में था, वही किया। बीते महीने जब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज को जत्थेदार बनाया गया तो उनका बयान सामने आया। जिसमें उन्होंने कहा कि रणजीत सिंह ढडरियां वाला को भी धर्म प्रचार करना चाहिए और श्री अकाल तख्त आना चाहिए। उसके बाद ही उनका विचार आने का हुआ। बीते पौने दो साल मन पर काम किया ढडरियां वाले ने कहा- पिछले पौने दो वर्षों में उन्होंने आत्मिक साधना की राह अपनाई और किसी भी व्यक्ति पर कोई टिप्पणी नहीं की। “जब मैंने बाहर मुखी रहना छोड़ा और अंतरमुखी होना सीखा, तभी आत्मिक शांति मिली। 11 दिन का साधना कैंप लगाया, जिससे मन बिल्कुल एक बच्चे की तरह शुद्ध हो गया।” संगठनवाद और ईगो पर चेतावनी ढडरियां वाले ने संगठनों से जुड़कर बढ़ रही ‘ईगो’ की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हम संगठन बनाकर अपने अहम को पालते हैं और दूसरों से लड़ते हैं। यह मानसिकता बदलनी चाहिए। तभी हम मजबूत होंगे।” धर्मांतरण और नशाखोरी पर गंभीर चिंता ढडरियां वाले ने उत्तर प्रदेश में एक साथ 3,000 सिखों के ईसाई धर्म अपनाने की घटना को गंभीर चिंता का विषय बताया। “पंजाब में भी यही हो रहा है। अब समय है कि हम एकजुट होकर इस सोच को बदलें।” उन्होंने यह भी कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या प्रचारकों की नहीं, बल्कि हर पंजाबी की जिम्मेदारी है।


