श्री-गुरुग्रंथ साहिब को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का निर्णय:गुरुदासपुर में ग्रामीणों ने किया विरोध, बोले- अपने जान दे देंगे- आंच नहीं आने देंगे

भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और पुंछ में गुरुद्वारे पर हुए हमले के बाद एसजीपीसी ने सीमावर्ती क्षेत्रों से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। एसजीपीसी के सदस्य सीमावर्ती गांवों का दौरा कर रहे हैं। वे गुरुद्वारों में स्थापित पावन स्वरूपों की जानकारी ले रहे हैं। गुरदासपुर के सीमावर्ती गांव काहना में जब एसजीपीसी की टीम पहुंची, तो ग्रामीणों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को भेजने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी जान देकर भी पावन स्वरूपों की रक्षा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर गांव छोड़ना भी पड़ा, तो सबसे पहले श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में वे देश के साथ खड़े हैं और उनके हौसले बुलंद हैं। एसजीपीसी प्रधान ने दिए आदेश गांव के रहने वाले बलविंदर सिंह और सतनाम सिंह ने बताया कि आज गुरुद्वारा श्री टाहली साहब जी के मुख्य सेवादार सरबजीत सिंह और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सदस्य उनके पास आए थे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों मे जंग चल रही है और पाकिस्तान की और से लगातार ड्रोन हमले किए जा रहे हैं और सीमावर्ती इलाकों में गांव खाली किए जा रहे हैं। इसी के चलते उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के जत्थेदार हरजिंदर सिंह धामी साहिब द्वारा आदेश दिए गए हैं कि सरहदी इलाकों का दौरा किया जाए और जो गांव खाली किए गए हैं वहां के गुरुद्वारा साहिब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूपों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया जाए। गांव से पावर स्वरुप नहीं जाने देंगे – सतनाम सिंह इसी के चलते आज वह गांव काहना में आए थे, लेकिन जहां पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की अच्छी तरह से सेवा संभाल की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह गांव से पावन स्वरूप नहीं भेजेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अगर जंग होती है तो वह अपनी जान भी दे देंगे, लेकिन पावन स्वरूप को कुछ नहीं होने देंगे। अगर उन्हें गांव छोड़ना पड़ता है तो वह सबसे पहले पावन स्वरूप को सुरक्षित जगह पर लेकर जाएंगे। इस विश्वास के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सदस्यों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप को वहां से नहीं हटाया।

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