अमृतसर | एसजीपीसी ने श्री हरमंदर साहिब के हेडग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह (55) को सेवानिवृत्ति से ढाई साल पहले ही जबरदस्ती सेवामुक्त कर दिया है। सिख पंथ के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब एसजीपीसी ने किसी हेडग्रंथी को इस तरह हटाया हो। तत्काल प्रभाव से उनकी सेवाएं खत्म करने का फैसला एसजीपीसी कार्यकारिणी की एक घंटे चली बैठक में लिया गया। एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि 18 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एसजीपीसी के प्रबंधों को लेकर गलत बयानबाजी करने के चलते ज्ञानी रघबीर सिंह पर कार्यवाही की गई है। नियम के अनुसार, उनके भत्ते, पीएफ और अन्य आर्थिक लाभ में कोई कटौती नहीं की जाएगी। दरअसल, 18 फरवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानी रघबीर सिंह ने गुरुद्वारा साहिबान की जमीनों की खरीद-फरोख्त में घोटाला होने की बात कही थी। साथ ही आरोप लगाए थे कि इन घोटालों में बादल परिवार को आर्थिक फायदा पहुंचाया गया। भास्कर इनसाइट ज्ञानी रघबीर सिंह 16 जून 2023 को श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार और हेडग्रंथी मनोनीत किए गए थे। 2 दिसंबर 2024 को उन्होंने शिअद प्रधान सुखबीर बादल व एक दर्जन से अधिक पूर्व अकाली मंत्रियों को तनखाहिया घोषित किया था। कहा था कि यह धार्मिक दंड पूर्व प्रधान सुखबीर बादल को अकाली सरकार के दौरान सिख पंथ की सही तरजमानी न कर पाने, गुरमीत राम रहीम को माफी दिलाने, बेअदबी की घटनाओं को न रोक पाने, दोषियों को सजा दिलाने में विफल रहने के चलते लगाया गया है। धार्मिक सजा के दौरान सुखबीर बादल ने स्वीकार किया था कि उन्होंने ही गुरमीत राम रहीम को माफी दिलाई थी। इस फैसले के करीब 3 माह बाद ही (7 मार्च 2025) ज्ञानी रघबीर सिंह पर पहली गाज गिरी थी। उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार पद से हटा दिया गया था। इसका कारण जत्थेदार पद की जिम्मेदारियां सही से न निभा पाना बताया था। इसी दिन तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी सुल्तान सिंह को भी उक्त पद से हटा दिया गया था। जत्थेदार सुल्तान सिंह पर भी 2 दिसंबर के फरमान की ही गाज गिरी थी क्योंकि तख्तों के सिंह साहिबान द्वारा 2 दिसंबर को लिए गए फैसलों में ज्ञानी सुल्तान सिंह भी बतौर जत्थेदार तख्त श्री केसगढ़ साहिब शामिल थे। उस समय हेडग्रंथी पद से छुट्टी नहीं दी गई थी। अब हेडग्रंथी पद से भी छुट्टी कर दी गई है।


