भास्कर न्यूज | कोंडागांव कहते हैं चमत्कार वहीं होते हैं, जहां विश्वास होता है। इस कथन का सजीव उदाहरण कोंडागांव में माता शीतला के मंदिर में रोज़ देखने को मिल रहा है, जहां एक स्ट्रीट डॉग ‘मोती’ पिछले चार वर्षों से अनोखी निष्ठा और अनुशासन के साथ माता की आराधना करता आ रहा है। यह आस्था किसी दो-चार दिन की नहीं, बल्कि सालों से चली आ रही वह दिनचर्या है, जिसने स्थानीय लोगों को अचंभित ही नहीं, बल्कि भावुक भी कर दिया है। मंदिर के पुजारी श्याम चरण निषाद बताते हैं कि ‘मोती’ की दिनचर्या बिल्कुल किसी समर्पित भक्त जैसी है। सुबह और शाम जैसे ही मंदिर में घंटी और शंख की आवाज़ गूंजती है, वह बिना किसी देरी के कहीं से भी दौड़ता हुआ मंदिर पहुँच जाता है। खास बात यह है कि मंदिर खुलने से पहले ही वह दरवाजे पर आकर बैठ जाता है और शांत भाव से खुलने का इंतजार करता है। अंदर आते ही वह मूर्ति के सामने उसी तरह सिर झुकाकर बैठ जाता है, जैसे मनुष्य भक्त करते हैं। आरती के समय उसकी अनुशासन और संयम की मुद्रा हर आने-जाने वाले को अचंभित कर देती है। न कोई भौंकना, न कोई कूदना-बस शांत भाव से आरती में सहभागी बनकर पूरे समय बैठे रहना। आरती के बाद जब प्रसाद दिया जाता है, तो वह श्रद्धा से प्रसाद ग्रहण करता है और फिर बिना किसी हलचल के बाहर निकल जाता है। इस दरबार में मोती अब केवल एक स्ट्रीट डॉग नहीं रहा, बल्कि आस्था का प्रतीक बन चुका है जो यह सिखाता है कि ईश्वर तक पहुंचने के लिए न शब्दों की आवश्यकता है, न दिखावे की। बस सच्चे भाव व पवित्र मन की जरूरत होती है। शहर में स्ट्रीट डॉग चुनौती, दूसरी ओर मोती बना मिसाल आज जब शासन-प्रशासन के लिए स्ट्रीट डॉग एक चुनौती बने हुए हैं, डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ रही हैं और लोग भयभीत रहते हैं, ऐसे समय में ‘मोती’ की यह आस्था भरी दिनचर्या समाज को एक अलग संदेश देती है। यह सिर्फ एक कुत्ते की कहानी नहीं, बल्कि निस्वार्थ भक्ति, अनुशासन और मौन श्रद्धा की अनोखी मिसाल है। कोई नहीं होता, तब मोती के साथ करता हूं आरती: पुजारी पुजारी श्याम चरण निषाद भावुक होकर बताते हैं “मैंने इसका नाम ‘मोती’ रखा है। कई बार मंदिर में कोई भक्त नहीं होते, तब बस मैं और मोती ही माता के सामने बैठकर आरती करते हैं। बारिश, धूप या ठंड मौसम कैसा भी हो मोती का मंदिर आना कभी नहीं छूटा। समझ नहीं पाता कि यह ईश्वर का चमत्कार है या ईश्वर का ही कोई रूप।


