संगठित हिंदू ही समर्थ भारत की नींव:हिन्दू सम्मेलन में सामाजिक समरसता-पर्यावरण संरक्षण; स्वदेशी, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य की सीख

दौसा जिले के सिकराय क्षेत्र के पांचोली गांव में हिंदू सम्मेलन व भजनोत्सव का आयोजन किया गया। जिसे संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता जिला संघचालक भगवान सहाय सैनी ने कहा कि संगठित हिंदू समाज ही समर्थ भारत की नींव है। समाज परिवर्तन केवल कहने से नहीं करने से होगा। पंच परिवर्तन-सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व बोध, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है स्वदेशी अपनाने की, अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने की तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों को समझने की। भविष्य के भारत के निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आधार बनाकर कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज की समस्याओं का समाधान समाज के लोगों के सहयोग और जिम्मेदारी से ही संभव है। परिवारों में विकसित हों संस्कार भाव वक्ता कमला शर्मा ने कहा कि पंच परिवर्तन के सभी विषयों को हमें अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। कुटुंब प्रबोधन प्रत्येक परिवार का हिस्सा होना चाहिए, जिसमें बच्चों को सनातनी संस्कार व अनुशासन भाव विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। संगठित, स्वाभिमानी और संस्कारयुक्त समाज ही भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में अग्रसर कर सकता है। रचनाओं से समझाया पंच परिवर्तन इस दौरान प्रसिद्ध गायक कलाकार रामू मास्टर ने भगवान शंकर के भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने पांच परिवर्तन पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि छोटे-छोटे अनुशासन ही बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बनते हैं। सम्मेलन की अध्यक्षता हरिनारायण शास्त्री ने की। इस दौरान लक्ष्मीनारायण बड़ा, ओमप्रकाश शर्मा, महाराज सिंह गुर्जर, विजय योगी, प्रेम सिंह समेत महिला-पुरुष मौजूद रहे।

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