जोधपुर के सरदारपुरा स्थित श्री कुंज में श्री राधा गोपाल प्रभु के विराजमान होने के उत्सव स्वरूप आयोजित कुंज महोत्सव श्रीमद् भागवत कथा का तीसरा दिन भी श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा रहा। गांधी मैदान में सत्संग भवन सेवा ट्रस्ट एवं कुंज महोत्सव आयोजन समिति की ओर से आयोजित एवं परमहंस रामप्रसाद महाराज के सानिध्य इस महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आज हरिद्वार से महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद स्वामी, रविंद्र आनंद, नांदेड़ से वेंकट स्वामी महाराज सहित अनेक संत पहुंचे। सेवा के नाम पर नियमों की उपेक्षा से बढ़ता है अहंकार महोत्सव में मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज के सान्निध्य में कथा का शुभारंभ हुआ। महाराज ने संत परंपरा, गुरु-संस्कार और वेश की मर्यादा पर विशेष बल देते हुए कहा कि गुरु द्वारा दी गई दीक्षा, नियम और वेश का पालन करना ही सच्ची साधना है। सेवा के नाम पर नियमों की उपेक्षा करने से सेवा का पूर्ण फल नहीं मिलता, बल्कि अहंकार बढ़ता है। सेवा से दैन्य भाव आना चाहिए, न कि अभिमान। प्रवचन के दौरान महाराज ने तुलसीदास की गीतावली और बाल लीला प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया और कहा कि गीतावली राम भक्ति का रसात्मक स्वरूप है, जिसे राम कथा के साथ अवश्य जोड़ा जाना चाहिए। राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि हर घर के बाहर यह लिख देना चाहिए कि जो दुष्ट है, वह अपनी दुष्टता से स्वयं समाप्त हो जाएगा। इस संदेश ने श्रोताओं को गहरी आत्मचिंतन की प्रेरणा दी। जोधपुर की संत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख महाराज ने अपने प्रवचन में जोधपुर की धार्मिक परंपरा और संत संस्कृति का भी उल्लेख करते हुए कहा- यह भूमि सदैव से संतों, भक्तों और वैष्णव परंपरा की साक्षी रही है। जोधपुर जैसे सांस्कृतिक नगरों में ऐसे आयोजनों के माध्यम से सनातन संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य हो रहा है, जिससे समाज में भक्ति, अनुशासन और मर्यादा का भाव मजबूत होता है।


