गांधी नगर स्थित सुमतिधाम में चल रहे पट्टाचार्य महोत्सव में आए देशभर के 388 संतों में से कई उच्च शिक्षित हैं। किसी ने गूगल की जॉब छोड़ी तो किसी ने एमएनसी का लाखों का पैकेज। कई संत उद्योगपति-कारोबारी परिवार से हैं। सभी ने सुख-सुविधाएं छोड़ वैराग्य की राह चुनी है। अब वे लोगों को जीवन जीने का प्रबंधन सिखा रहे तो पर्यावरण बचाने का संदेश भी दे रहे। महोत्सव में 13 प्रमुख जैन संत (आचार्य) और आठ उपाध्याय शामिल हुए हैं। पट्टाचार्य महोत्सव का शुक्रवार को समापन हुआ। संतों ने अपने गुरु आचार्य विशुद्ध सागर जी को प्रणाम किया और अपने-अपने ससंघ के साथ विहार किया। पहली बार इतने आचार्य और उपध्याय इंदौर पहुंचे- जैन समाज के इतिहास में यह पहला मौका है, जब इतने आचार्य और उपाध्याय इंदौर में एक साथ किसी धार्मिक आयोजन में शामिल हो रहे हैं। 45 दीक्षाएं दी आचार्य ने, ये सभी समृद्ध परिवार के 1. आचार्य विशुद्ध सागर : दीक्षाकाल के बाद से अब तक 75 हजार से ज्यादा किमी पैदल चल चुके हैं। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने 45 दीक्षाएं दी हैं। इनमें सभी लोग पढ़े-लिखे और समृद्ध परिवार से हैं। आचार्यश्री ने 150 से ज्यादा ग्रंथ लिखे हैं। वहीं, मुनि सारस्वत सागर को कई ग्रंथ कंठस्थ हैं।
2. मुनि निसंग सागर: आईआईटी पासआउट हैं। मल्टीनेशनल कंपनी में 60 लाख रुपए का पैकेज था।
3. मुनि समत्व सागर: एमटेक, बिट्स पिलानी से कर चुके। गूगल में जॉब करते थे।
4. मुनि जितेंद्र सागर : सीए हैं तो मुनि आदित्य सागर एमबीए कर चुके हैं। वे पांच भाषाएं जानते हैं।
श्रद्धालुओं को दे रहे लाइफ मैनेजमेंट की सीख
जैन संत देशभर से आए श्रद्धालुओं को लाइफ मैनेजमेंट की सीख दे रहे हैं। वे बताते हैं कि नकारात्मक भाव तरक्की में बाधक हैं। सिखा रहे कि जीवन में छोटी-छोटी खुशियों में कैसे खुश रहें, जीवन को नई दिशा कैसे दें। लाइफ मैनेजमेंट से लेकर धर्म पर पुस्तकें भी संतों ने लिखी हैं।


