संभल के चंदौसी शहर के मोहल्ला लक्ष्मणगंज में आज फिर तीसरे दिन बावड़ी कुए की खुदाई होगी। कल डीएम एसपी ने किस जगह का निरीक्षण किया था और नक्शा भी देखा था। शिप्रा रानी ने बताया कि चन्दौसी में ऐतिहासिक बाबड़ी कुएं की खुदाई के दौरान मौके पर पहुंची एक महिला ने कर दिया बड़ा दावा। खुद को बताया बाबड़ी विरासत का मालिक। महिला ने दावा किया है कि वह महारानी स्व. सुरेन्द्रवाला की सबसे छोटी पोती है। इस संपत्ति पर उनका ही मालिकाना हक है। उन्होंने बताया कि इस बाबड़ी कुएं के आसपास हमारी खेती हुआ करती थी। यह हमारी ऐतिहासिक जगह- शिप्रा रानी शिप्रा रानी ने बताया- चंदौसी में जो यह खुदाई हो रही है, यह हमारी ऐतिहासिक जगह है। दादी सुरेंद्र बाला, बाबा जगदीश कुमार जी इनकी ही संपत्ति है, उनके बेटे हैं लल्ला बाबू विष्णु कुमार। मैं उनकी सबसे छोटी बेटी हूं और यह हमारा पुश्तैनी फार्म हाउस था। यहां पर हम लोगों को एक कुआं बना हुआ था। बावड़ी वहां पर यह एक हिस्टोरिकल प्लेस बनी हुई थी। सन् 95 के बाद तक तो यह अलाइव था, मतलब हम लोग जाते थे। मम्मी पापा के साथ वहां पर पिकनिक मनाते थे। हम लोग वहां पर इंजॉय करते थे। खेती-बाड़ी हुआ करती थी। फार्म हाउस भी हुआ करते थे। यादगार पल तो यही है कि सारा बचपन वहीं पर बीता है। यहां से कोठी से जुड़ी हुई लक्ष्मणगंज जो है, सारा हमारे ही कवर में आता था। यहीं से चले जाते थे टहलते हुए किसी सर्वेंट के साथ वहां पर पूरा दिन एंजॉय करते थे। फॉर्म्स में वहां पर गन्ने की खेती हुआ करती थी। मैं यह कहना चाहूंगी कि मिरेकल्स होते हैं, लाइफ में यह भी भगवान ने हमारे लिए मिरेकल्स किया। जिसको हम भूल चुके थे। वह फिर से रिबिल्ट हो रही है। हमारे सामने यह सवाल आया कि बावड़ी जिंदा है, तो यह हमारे लिए बहुत ही प्राउड की बात है। लल्ला बाबू विष्णु कुमार जी की पांच बेटियां थी। अकेला जो आदमी होता है, वह अपनी संपत्ति पर ध्यान नहीं दे पाता और लोगों को उसको हथियाना शुरू कर देते हैं। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बावड़ी का नक्शा देखकर कहा- वर्तमान में 210 वर्ग मीटर है, लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है, जिसे हटवाया जाएगा। यह लगभग 125 से 150 साल पुरानी होगी। वहीं, संभल के प्रसिद्ध श्री क्षेमनाथ तीर्थ मंदिर परिसर में 30 फीट ऊंची हनुमान मूर्ति के पास भी एक कुआं मिला है। इसमें 8 फीट तक पानी भरा है। इस कुएं पर पक्की फर्श करके पाट दिया गया था। लेकिन, रविवार शाम महंत बाल योगी दीनानाथ और श्रद्धालुओं ने इस फर्श को तोड़कर कुएं के अंदर पानी देखा। यह संभल का पहला कुआं है, जिसमें पानी मिला है। अब विस्तार से जानिए पानी वाला कुआं मिलने का मामला गांव शहजादी सराय में श्री क्षेमनाथ तीर्थ मंदिर है। यहां रविवार शाम करीब साढ़े 4 बजे महंत बाल योगी दीनानाथ ने श्रद्धालुओं के साथ मिलकर एक पक्के फर्श को तोड़ दिया। इसके नीचे एक कुआं दिखा, जिसमें 8 फीट नीचे तक पानी दिखाई दिया। इसकी सूचना महंत ने जिला और तहसील प्रशासन को दी। महंत बाल योगी दीनानाथ ने बताया- संभल में और भी कुएं निकले हैं, लेकिन यह पहला है जिसमें पानी मिला है। क्षेमनाथ तीर्थ नैमीशरणीय है। महंत ने कहा कि संभल के 68 तीर्थों में से यह सबसे प्रमुख तीर्थ है। महंत बाल योगी दीनानाथ नाथ संप्रदाय से आते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसी संप्रदाय से हैं। दोनों को कई बार नाथ संप्रदाय के कार्यक्रमों में एक साथ देखा जा चुका है। अब जानिए उस बावड़ी के बारे में, जहां सुरंग भी मिली लक्ष्मणगंज में 17 दिसंबर को बांके बिहारी का मंदिर खंडहर अवस्था में मिला था। 21 दिसंबर यानी शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में इसी मोहल्ले की बावड़ी पर अतिक्रमण की शिकायत की गई थी। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने नगर पालिका परिषद चंदौसी को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, जेसीबी से अतिक्रमण हटाते समय बावड़ी मिली, रात तक जेसीबी और मजदूर खुदाई करते रहे तो एक सुरंग भी मिली। पहली बार सामने आए बावड़ी के फोटो-वीडियो राधा-कृष्ण मंदिर से 150 मीटर दूर है बावड़ी
दूसरे दिन सुबह फिर नगर पालिका की टीम लक्ष्मणगंज पहुंची। रविवार दोपहर 1:30 तक 8 से 10 मीटर तक सुरंग की खुदाई की जा चुकी है। बांके बिहारी मंदिर से बावड़ी की दूरी 150 मीटर है। डीएम के अनुसार बावड़ी का एरिया 200 मीटर के करीब है। आस-पास कब्जा करके लोगों ने मकान बना लिए हैं। अभी तक नाप नहीं की गई है। डीएम बोले- इमारत को चुनवा दिया
डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि यह 210 एरिया बावड़ी तालाब में दर्ज है। स्थानीय लोगों ने बताया कि बिलारी के राजा के नाना के समय की बावड़ी बनी हुई थी, इसके सेकेंड फ्लोर और थर्ड फ्लोर मार्बल के बने हैं, ऊपर का तल ईंटों का बना हुआ है। इसमें एक कूप और 4 कमरे हैं, इसे मिट्टी से चुन दिया गया था। कल जन सुनवाई के दौरान इसकी शिकायत मिली, कल मिट्टी हटवाई गई, इसकी धीरे-धीरे खुदाई करवाई जा रही है जिससे इसके स्ट्रक्चर को नुकसान न हो, वर्तमान में 210 वर्ग मीटर है जिस पर कब्जा है। उससे अतिक्रमण हटवाया जाएगा। बताया जा रहा है यह लगभग 125 से 150 साल पुरानी होगी। ASI टीम से सर्वे कराने पर के सवाल पर DM ने कहा कि अभी हम देख रहे हैं, यदि जरूरत पड़ेगी तो ASI को भी पत्र लिखेंगे। मुझे कल जन सुनवाई के माध्यम से पता चला कि चंदौसी का बांके बिहारी मंदिर करीब 150 साल पुराना है, इसकी दो मूर्तियां अलग-अलग मंदिरों मैं सुरक्षित रखी हुई हैं। जो लोग यहां पूजा-पाठ करते थे उनसे बात करके इसका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इसके आस-पास जो भी अतिक्रमण हुआ है उसे हटवाया जाएगा। जांच में सब क्लियर हो जाएगा पालिका चंदौसी ईओ कृष्ण सोनकर ने बताया कि खुदाई कल से चल रही है। जैसे सुरंग और इमारत के बारे में पता चला तो और अधिक टीम लगाकर खुदाई करवा रहे हैं। जहां तक सुरंग होगी, खुद ही सामने आ जाएगी। बताया जा रहा है कि यहां स्टेट रहा है, रियासत का यह पोर्टल रहा है। अब संज्ञान में आ गया, तो सच भी सामने आ जाएगा कि यह क्या और कैसे है? सारी बातें क्लियर हो जाएंगी। कल्कि मंदिर और कृष्ण कूप का सर्वे इससे पहले शनिवार सुबह ASI टीम ने संभल के कल्कि मंदिर का सर्वे किया था। टीम ने मंदिर के गुंबद, दीवारों पर नक्काशी और परिसर की तस्वीरें और वीडियो लिए। इसके साथ ही, परिसर में स्थित कृष्ण कूप का भी सर्वेक्षण किया गया। ————————- ये खबर भी पढ़ें संभल में कुएं की खुदाई में सुरंग मिली, पुरानी इमारत में तहखाना होने की संभावना, ASI ने कल्कि मंदिर का सर्वे किया संभल के चंदौसी में शनिवार शाम कुएं की खुदाई के दौरान सुरंग मिली है। 2 जेसीबी लगाकर प्राचीन बाबली कुएं की खुदाई शुरू की गई। इस दौरान जमीन के नीचे प्राचीन इमारत भी निकली। तहखाना होने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। इससे पहले भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) की टीम ने सुबह कल्कि मंदिर का सर्वे किया। टीम ने गुंबद की तस्वीरें खींचीं। दीवारों पर नक्काशी के वीडियो बनाए। इसके अलावा, मंदिर परिसर में स्थित कृष्ण कूप यानी कुएं का भी सर्वे किया। (पूरी खबर पढ़ें)


