संस्कृति विभाग की ये कैसी संस्कृति:कार्ड में जिन कलाकारों के नाम उन्हें पता ही नहीं; कलाकार बोले- बिना इजाजत कार्ड पर नाम डाला

तानसेन समारोह के शताब्दी वर्ष में संस्कृति विभाग के कारिंदे जहां एक ओर कलाकारों को धोखा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने संगीत रसिकों को ठगने में कसर नहीं छोड़ी है। वादी संवादी कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुति के लिए जिन कलाकारों के नाम कार्ड पर छापे गए उन्हें पता ही नहीं है कि किसी कार्यक्रम में जाना है। वहीं, जिन कलाकारों को प्रस्तुति देना है, उनके कार्ड पर नाम भले ही न छापे गए हों, लेकिन उन्हें दस दिन पहले बता दिया गया था कि उन्हें तानसेन समारोह के तहत होने वाले कार्यक्रम में प्रस्तुति देने ग्वालियर जाना है। तानसेन समारोह के दौरान वादी संवादी कार्यक्रम के तहत राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में सोमवार को दिल्ली की रीता देव की प्रस्तुति थी। इन्हें भारतीय संगीत में उप शास्त्रीय शैलियों की अवधारणा विषय पर संगीत ​रसिकों के साथ परिचर्चा के साथ गायन की प्रस्तु​ति भी देना थी। लेकिन इनके स्थान पर भोपाल के प्रोफेसर पंडित सज्जनलाल ब्रह्मभट ने प्रस्तुति दी। इसी प्रकार 17 दिसंबर को दोपहर में तीन बजे से मुंबई के कलाकार विश्वनाथ कान्हेरे का नाम कार्ड में प्रकाशित किया गया है। लेकिन इनके स्थान पर बनारस घराने के तबला बादक पंडित अरविंद कुमार आजाद कला ​रसिकों से चर्चा करने के साथ प्रस्तुति देंगे। उन कलाकारों का दर्द जिन्हें आना था बिना इजाजत कार्ड पर मेरा नाम डाला ग्वालियर जाने के लिए किसी मैडम की कॉल आई थी, लेकिन बाद न मुझे कोई लेटर भेजा न संपर्क किया। कलाकार को कहीं जाने से पहले तैयारी करना पड़ती है। कार्ड पर मेरी इजाजत ​के बिना नाम छापा है।
-विश्वनाथ कान्हेरे, मुंबई मेरा आना तय नहीं था, फिर नाम कैसे छापा मेरा ग्वालियर आना तय नहीं था, फिर कार्ड पर मेरा नाम कैसे छपा, यह समझ से बाहर है। ग्वालियर न आ पाना मैं दुर्भाग्य मानती हूं, क्यों​कि मैं खुद ग्वालियर घराने से ताल्लुक रखती हूं। -रीता देव, दिल्ली जिन कलाकारों का नाम छपा है उनको बताने में कुछ तकनीकी समस्या आ गई थी। साथ ही जिन कलाकारों को बुलाया गया है उनके बारे में विज्ञापन प्रकाशित कर सभी को सूचना दी गई थी।’ -एनपी नामदेव, संस्कृति संचालक जो कलाकार आए, वह बोले- मुझे आयोजकों ने पहले ही बता दिया था आयोजकों ने मुझे पहले ही बता दिया कि आपको प्रस्तुति देनी है। इसलिए मेरा यहां आना पहले से तय था। आप क्या कह रहे हैं मेरे हाथ में जो कार्ड है उसमें मेरा नाम है, शायद आप जिस कार्ड की बात कर रहे हैं वह गलत कार्ड हो सकता है। -प्रो. पंडित सज्जनलाल ब्रह्मभट, भोपाल 10 दिन पहले ही दे दी थी सूचना ग्वालियर में तानसेन समारोह के तहत आयोजित होने वाले वादी संवादी कार्यक्रम में मुझे 17 दिसंबर को शामिल होना है, इसकी सूचना दस दिन पहले ही दे दी गई थी। -पं.अरविंद कुमार आजाद, तबला बादक

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