आसमान में ऊंची उड़ान भरते कबूतरों को देखने वाले शायद यह नहीं जानते कि कई बार यह उड़ान स्वाभाविक नहीं, बल्कि ‘तैयार’ की हुई होती है। विधायकपुरी थाना पुलिस की कार्रवाई में दो कार्टूनों से 42 कबूतर बरामद होने के बाद कबूतरों की उड़ान पर सट्टेबाजी के खेल की परतें सामने आई हैं। पुलिस ने मकराना (नागौर) निवासी सरफराज खान, मोहम्मद जुनैद और मोहम्मद सोनू को गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ये कबूतर टोंक से मकराना ले जाए जा रहे थे। जांच में पक्षियों को ‘ब्ल्यू रॉक पिजन’ प्रजाति का पाया गया। सूत्रों के अनुसार मैदान में उतारने से पहले कबूतरों को 30-60 दिन की तैयारी से गुजारा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि केवल पंख कतर दिए जाएं और त्वचा को नुकसान न पहुंचे तो नए पर सामान्यत 4-8 सप्ताह में वापस उग आते हैं। बताया जाता है कि इसी अवधि को ‘ट्रेनिंग विंडो’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पक्षी नियंत्रित दायरे में रहे और अभ्यास कराया जा सके। आवाज की पहचान, फिर आसमान में दांव शुरुआती चरण में कबूतरों को सीमित दायरे में छोड़कर दाना और खास सीटी या आवाज से जोड़ा जाता है। धीरे-धीरे दूरी और ऊंचाई बढ़ाई जाती है। अंतिम चरण में झुंड के साथ खुली उड़ान कराई जाती है। उड़ान की ऊंचाई, हवा में टिके रहने का समय और मालिक की आवाज पर वापसी के आधार पर दांव लगाए जाने की बात सामने आई है। जयपुर के किन इलाकों में सक्रिय सूत्रों के अनुसार घाट की गुणी आजाद नगर, मोती डूंगरी, आदर्श नगर, घाटगेट, खोह-नागोरियान, ईदगाह, झालाना, रामगंज, ब्रह्मपुरी और दिल्ली रोड के कुछ हिस्सों में यह गतिविधियां सक्रिय हैं। एक कबूतर पर 20 हजार का दांव एक मुकाबले में करीब 30 कबूतर एक साथ उड़ाए जाने की जानकारी मिली है। प्रत्येक मालिक का दांव 20 हजार रुपए से शुरू होता है। कुल राशि करीब 6 लाख रुपए तक पहुंच सकती है। जीतने वाले कबूतर के मालिक को पूरी रकम दी जाती है। पहचान के लिए कबूतरों के पैरों में मालिक के नाम की चिट या रिंग लगाई जाती है। उड़ान की दिशा और ऊंचाई पर नजर रखने के लिए दूरबीन का इस्तेमाल किया जाता है।


