जल्द ही सड़कों पर दौड़ने वाले भारी वाहन अब केवल ”लोहे का ढांचा” नहीं रहेंगे, बल्कि वे ड्राइवर की गलती को सुधारने वाली हाईटेक मशीन बनेंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय ने भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए सुरक्षा के ऐसे कड़े मानक तय किए हैं, जो अगले दो साल में भारतीय सड़कों की तस्वीर बदल देंगे। अब अगर ट्रक के सामने अचानक कोई बाधा आती है और ड्राइवर ब्रेक नहीं लगा पाता, तो ट्रक का ”एडवांस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम” खुद ही गाड़ी को रोक देगा। 1 अक्टूबर 2027 से यह तकनीक अनिवार्य होने जा रही है। इतना ही नहीं, परिवहन मंत्रालय ने ड्राइवर की थकान और मानवीय चूक को सड़क हादसों की बड़ी वजह माना है। इसके समाधान के लिए 2028 से ”ड्राइवर उनींदापन पहचान प्रणाली” लागू की जाएगी। यानी अगर स्टेयरिंग थामे चालक की पलक झपकी या उसे नींद आई, तो वाहन में लगा सेंसर तुरंत उसे चेतावनी देगा। इसके साथ ही, अब ट्रकों में ब्लाइंड स्पॉट की समस्या भी खत्म होगी, क्योंकि सेंसर और कैमरों के जरिए ड्राइवर को आसपास मौजूद पैदल यात्रियों की सटीक जानकारी मिलती रहेगी। अक्टूबर 2025 से सभी नए ट्रकों के केबिन में एयर कंडीशनर (एसी) का होना अनिवार्य कर दिया गया है। परिवहन मंत्रालय ने प्रदेश में अब तक हुए सड़क हादसों के बारे में परिवहन अधिकारियों से जानकारी मांगी गई है। सड़क हादसे रोकने के लिए अब बड़े स्तर के आईडीटीआर (इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च) को 17.25 करोड़ रुपए की सहायता दी जाएगी। इसी प्रकार, क्षेत्रीय स्तर पर ड्राइवरों को प्रशिक्षित करने वाले आरडीटीसी के लिए 5.50 करोड़ रुपए और स्थानीय डीटीसी (ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर) के लिए 2.50 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।


