सतना जिले के उचेहरा वन परिक्षेत्र की कुशल बीट में शनिवार को शिकारियों द्वारा लगाए गए क्लच वायर के फंदे में एक तेंदुआ फंस गया। गश्ती टीम की नजर पड़ने पर मुकुंदपुर जू की टीम को बुलाया गया। करीब 2 घंटे की मशक्कत के बाद तेंदुए को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू किया गया और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद वापस जंगल में छोड़ दिया गया। वहीं, डॉग स्क्वायड की मदद से वन विभाग ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है। शाम को मुकुंदपुर जू से रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. नितिन गुप्ता ने तेंदुए को बेहोश करने के लिए ट्रेंकुलाइजर गन का इस्तेमाल किया। शुरुआती दो प्रयास विफल रहे, लेकिन तीसरे प्रयास में तेंदुआ बेहोश हो गया। इसके बाद टीम ने सावधानीपूर्वक तार काटकर उसे मुक्त कराया। रेस्क्यू के बाद स्वास्थ्य परीक्षण में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। गले में फंसा था फंदा, रेस्क्यू कर छोड़ा जंगल
रेंजर सचिन नामदेव ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुशला बीट से लगे बोदाहार गांव के खेत में एक तेंदुआ बाड़ी में फंसा हुआ है। सूचना मिलते ही गश्ती टीम मौके पर पहुंची। निरीक्षण में पाया गया कि तेंदुआ क्लच वायर के फंदे में फंसकर छटपटा रहा था। उसके कमर में फंदा लगा हुआ था लेकिन कसा न होने से वह निकलने की कोशिश कर रहा था। डीएफओ के निर्देशन में शाम करीब 4 बजे रेस्क्यू टीम डॉग स्क्वॉड के साथ घटनास्थल पर पहुंची। विशेषज्ञों ने तेंदुए को ट्रैंक्युलाइज कर उसका मेडिकल परीक्षण किया। जांच में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से परसमनिया के घने जंगल में छोड़ दिया गया। डॉग स्क्वॉड ने खोला राज
रेस्क्यू के बाद डॉग स्क्वॉड ने मौके से बरामद क्लच वायर को खोजी कुत्ते से सूंघाया। डॉग करीब दो किलोमीटर तक पीछा करते हुए खोह गांव पहुंचा और सीधे एक घर में घुस गया। पूछताछ में पता चला कि मकान विनोद कुमार रावत पिता राममिलन रावत का है। संदेह के आधार पर पूछताछ में विनोद कुमार रावत ने तेंदुए को फंसाने की बात स्वीकार कर ली। वन विभाग ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है। रविवार को उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा। आरोपी को पकडऩे में परिक्षेत्र सहायक बृजमोहन रावत, भारत सिंह नागर, इंदल सिंह श्याम, महेश प्रजापति, ध्रुव धाकड़, दीपक सिंह, शंकर यादव, शहादत हुसैन आदि शामिल रहे। देखिए तस्वीरें…


