भास्कर न्यूज़ | लुधियाना| पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के किसान ग्राउंड में चल रहे स्वदेशी मेले के छठे दिन शाम को गायक सतिंदर वडाली ने अपनी दमदार और रूहानी आवाज से सूफियाना शाम सजाई, करीब दो घंटे तक दर्शक सुरों में डूबे झूमते रहे। वहीं उससे पहले हार्बी संघा की प्रस्तुति ने माहौल को पूरी तरह खुशनुमा बना दिया था। इसके अलावा आईजी फरीदकोट रेंज निलम्बरी विजय जगदले ने मेले में पहुंचकर भारतीय उत्पादों की खुलकर सराहना की और स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया। स्वदेशी मेला आयोजन समिति के सदस्य गुरदीप सिंह गोशा, हरीश दुआ और मोहित गोयल ने उनका स्वागत करते हुए देशभर से आए स्वदेशी उत्पादों के स्टॉलों की जानकारी दी। मेला प्रमुख गुरदीप सिंह गोशा ने कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में कहीं पीछे छूटती जा रही भारतीय परंपराओं को फिर से जीवित करना ही स्वदेशी मेले का मूल उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि स्वदेशी जागरण मंच लगातार भारतीय संस्कृति, कारीगरी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। हरीश दुआ ने कहा कि स्वदेशी को अपनाए बिना भारत का भविष्य अधूरा है। वहीं मोहित गोयल ने कहा कि हजारों लोगों ने विदेशी उत्पादों के स्थान पर भारतीय उत्पादों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने का संकल्प लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब हम अपनी विरासत को संभालते हुए स्वदेशी को प्राथमिकता देंगे। मेले में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने भी भागीदारी की और स्वदेशी उत्पादों के प्रति उत्साह दिखाया। समाज की ओर से मोहन भागवत जी की बैठक में इंदरजीत सिंह मक्कड़, अमरजीत सिंह बिंद्रा, हरविंदर सिंह नामधारी, जगजीत सिंह खालसा और हरपाल सिंह भी मौजूद रहे। स्वदेशी मेले ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्थानीय उत्पादों को अपनाकर ही देश की आर्थिक और सांस्कृतिक मजबूती सुनिश्चित की जा सकती है।


