सोनू कुमार | गढ़वा जिला मुख्यालय स्थित गढ़वा सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में मरीजों को बुनियादी जांच सुविधाएं भी सुचारू रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। स्थिति यह है कि एक्सरे, रक्त जांच और अल्ट्रासाउंड जैसी आवश्यक जांच सेवाओं को लेकर मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां मैडल लैब, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, व रक्त जांच जैसी कई सेवाएं पिछले तीन माह से बंद हो गई हैं। इन सभी जांच के लिए मरीज को बाहर जाकर महंगे दामों पर करना पड़ता है। तीन महीना बीत जाने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन अस्पताल में इन सेवाओं को नियमित रूप से बहाल करने की दिशा में अभी तक कोई पहल नहीं किया है। सदर अस्पताल में पहले मैडल लैब तथा मणिपाल संस्था के माध्यम से एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सेवाएं संचालित की जाती थीं। इन सेवाओं के तहत बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) कार्डधारकों को निःशुल्क जांच की सुविधा दी जाती थी, लेकिन पिछले करीब तीन महीनों से यह व्यवस्था बाधित है। अक्टूबर माह से कई जांचों के लिए सदर अस्पताल में ही मरीजों से शुल्क लिया जा रहा है। जबकि कुछ सेवाएं 15 अक्टूबर से बंद बताई जा रही हैं। मरीजों से एक्सरे के लिए 128 रुपये, 135 रुपये और 195 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। वहीं अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 425 रुपए से लेकर 680 रुपए तक की राशि ली जा रही है। ऐसी स्थिति में खासकर बीपीएल कार्डधारी मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिन गरीब परिवारों को सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद होती है, उन्हें अब जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। सदर अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। औसतन रोजाना 200 से 300 मरीज रक्त जांच के लिए आते हैं। वहीं 100 से 120 मरीज एक्सरे के लिए और 60 से 70 मरीज अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पहुंचते हैं। सड़क दुर्घटना, गंभीर बीमारी और अन्य आपात स्थिति में आने वाले मरीजों के लिए यह जांच अत्यंत आवश्यक होती है। जांच सुविधा में व्यवधान के कारण इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। बीपीएल मरीज से पैसे लेना गलत : सिविल सर्जन इस संबंध में पूछे जाने पर सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने कहा कि मणिपाल द्वारा संचालित एक्सरे और अल्ट्रासाउंड केंद्र में बीपीएल कार्डधारकों को सरकार के निर्देशानुसार निःशुल्क जांच की सुविधा दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बीपीएल मरीजों से पैसे लिए जा रहे हैं तो यह पूरी तरह गलत है और इसकी जांच कर संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संस्था ने 15 अक्टूबर से काम बंद कर दिया है, तो ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की राशि नहीं ली जानी चाहिए। अन्यथा सेवा पूरी तरह से बंद की जाए। सिविल सर्जन ने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की जांच कर उचित कदम उठाए जाएंगे।


