पारंपरिक सौंदर्यबोध और समकालीन प्रयोगधर्मिता का अनूठा संगम बनी चित्रकार सपना महेश की कला प्रदर्शनी ‘हिमापन’ की गुरुवार से शुरू हुई। इसका उद्घाटन सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हिंदू सिंह सोढा और प्रख्यात ध्रुवपद गायिका मधु भट्ट तैलंग ने किया। उद्घाटन के साथ ही प्रदर्शनी कला प्रेमियों के लिए खोल दी गई, जहां दर्शकों ने प्रकृति और सृजन के बीच एक नए सौंदर्य संवाद को अनुभव किया। ‘हिमापन’ की सबसे बड़ी विशेषता कमल के जीवंत पत्तों को चित्रांकन का आधार बनाना रही। कमल पत्ता यहां केवल सतह नहीं, बल्कि एक सक्रिय सह-रचनाकार के रूप में उपस्थित नजर आया। पत्तों की स्वाभाविक रेखाएं, उसकी बनावट, उसका क्षरण और समय के साथ बदलती उसकी संरचना को सपना महेश ने प्रयोग के रूप में कैनवास के साथ सजाया है। सपना महेश ने इन पत्तों पर रंगों के माध्यम से आकृतियां, प्रतीक और कथाएं उकेरी हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल चित्रांकन नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ एक आत्मीय संवाद है। संभवतः राजस्थान में पहली बार इस तरह का प्रयोग किया गया है, जहां पारंपरिक कैनवास को छोड़कर जैविक तत्व को ही अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया गया है। प्रकृति, आध्यात्म और स्त्री संवेदना का समागम प्रदर्शनी में प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिक प्रतीकों को कमल पत्तों की जीवंतता के साथ जोड़ा गया है। कमल भारतीय सांस्कृतिक चेतना में पवित्रता, उभार और आध्यात्मिक उन्नयन का प्रतीक रहा है। सपना महेश ने इसी प्रतीक को समकालीन संदर्भ में पुनर्परिभाषित किया है। सपना महेश ने कहा कि ‘हिमापन’ उनके लिए प्रकृति से संवाद की प्रक्रिया है, जहां हर पत्ता अपनी अलग कथा और संवेदना लेकर सामने आता है। पत्तों की नाजुक बनावट पर रंगों की परतें एक तरह का दृश्यात्मक काव्य रचती हैं, जिसमें स्थायित्व और क्षणभंगुरता दोनों साथ दिखाई देते हैं। प्रयोगधर्मी कृतियां भी आकर्षण का केंद्र कमल पत्तों पर चित्रण के साथ-साथ प्रदर्शनी में अन्य प्रयोगधर्मी कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं। विभिन्न शहरों से संकलित पत्थरों पर पेपरमेशी तकनीक के माध्यम से तैयार रचनाएं विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। पत्थर जैसी कठोर वस्तु पर कोमल और रंगीन कलात्मक हस्तक्षेप, प्रकृति और मानव सृजन के संबंध को नए सिरे से स्थापित करता है। इसके अलावा नाथद्वारा शैली की पेंटिंग को भी नए शिल्प और दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे पारंपरिक कला और आधुनिक अभिव्यक्ति के बीच एक संवाद स्थापित होता है। प्रदर्शनी में कुल 22 से 23 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जो विविध माध्यमों और संवेदनाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। सौम्या गुर्जर भी देखने पहुंची कलाकृतियां प्रदर्शनी का अवलोकन करने जयपुर की निवर्तमान मेयर सौम्या गुर्जर भी पहुंचीं। उन्होंने कमल पत्तों पर किए गए इस प्रयोग को अभिनव बताते हुए कलाकार की रचनात्मक दृष्टि की सराहना की। इस अवसर पर शहर की महिला उद्यमी कमला पोद्दार भी मौजूद रहीं। प्रदर्शनी तीन दिनों तक आमजन के लिए खुली रहेगी। 20 फरवरी को सुबह 11:30 बजे हिंदू सिंह सोढा के साथ विशेष चर्चा और उसके बाद ‘हिमापन मोनोलॉग’ आयोजित होगा, जिसमें कलाकार अपनी सृजन-प्रक्रिया और वैचारिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालेंगी। 21 फरवरी को सुबह 11:30 बजे प्रसिद्ध लोक गायिका रंजना चौधरी एक विशेष चित्र का अनावरण करेंगी और कला पर संवाद करेंगी।


