केन्द्र सरकार की ओर से हर साल करवाए जाने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार कोटा नगर निगम दस लाख से अधिक की आबादी वाले निगमों में शामिल होगा। उसके हिसाब से ही रैकिंग की जाएगी। हालांकि इस बार भी सर्वेक्षण 12 हजार 500 अंकों का ही है। सर्वेक्षण के सत्यापन के लिए केन्द्रीय टीम के मार्च में कोटा आएगी। केन्द्र सरकार की ओर से हाल में स्वच्छता सर्वेक्षण की टूल किट जारी की गई थी। जिसमें इस बार भी सर्वेक्षण तो 12 हजार 500 नंबर का ही है। लेकिन उसमें सिटीजन फीडबैक के अंक बढ़ाकर एक हजार कर दिए गए हैं। कचरा सेग्रीगेशन के करीब 15 सौ अंक हैं। कोटा नगर निगम की तरफ से रैंकिंग में अव्वल आने की कोशिश तो की जा रही है लेकिन निगम के सामने मुश्किलें कम नहीं है। कोटा ट्रेचिंग ग्राउंड में लगा कचरे का पहाड़ और लीगेसी वेस्ट भी निगम के लिए बड़ी समस्या है। निगम की ओर से इसके निस्तारण के प्रयास किए जा रहे हैं। उसमें काफी हद तक सफलता मिली भी है। लेकिन अभी इसमें और काम बाकि है। शहर में नगर निगम की ओर से रात के समय भी मुख्य रास्तों की सफाई करवाई जा रही है। लेकिन अभी भी कचरा पॉइंट पर लगे कचरे के ढेर कम नहीं हो रहे हैं। निगम की ओर से कचरा पॉइंट से कचरा उठाने की व्यवस्था भी की हुई है लेकिन उसके बाद भी मुख्य मार्ग व कई कचरा पॉइट ऐसे हैं जहां हमेशा ही कचरा पड़ा रहता है। वहीं नगर निगम के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण में सबसे बड़ी चुनौती गीला सूखा कचरे को अलग करना है। निगम की ओर से घर-घर कचरा संग्रहण का काम टिपरों के माध्यम से कराया जा रहा है। हर वार्ड में दो से तीन टिपर चल रहे हैं। टिपरों में गीला व सूखा कचरा अलग-अलग इकटठा करने के लिए अलग अलग बॉक्स भी बनाए हुए हैं। लेकिन अभी तक भी यह व्यवस्था पूरी तरह से शहर में लागू नहीं हो सकी है। जिससे रैकिंग में इस श्रेणी में मिलने वाले अंक कम हो जाते हैं। वहीं निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा का कहना है कि निगम के सौ में से करीब आधे 50 वाडों में गीला-सूखा कचरा अलग करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। घरों पर टिपरों के समय पर पहुंचने की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। शौचालयों की मरम्मत व साफ सफाई करवाई जा रही है। साथ ही कई कामों के टेंडर हो चुके हैं।


