सब्र, शुक्र और आत्म-अनुशासन सिखाता है रमजान का महीना, 13 घंटे लंबा रोजा रख शाम को दुआ की

भास्कर न्यूज | जालंधर रमजान का पहला रोजा वीरवार को रखा गया। शाम 6:20 बजे इफ्तारी की गई। शाम को सभी मस्जिदों में इफ्तार का आयोजन किया गया और उसके बाद मगरिब की नमाज पढ़ी गई। रात ईशा की नमाज के बाद तराबीह की विशेष नमाज भी पढ़ी गई। शुक्रवार को रमजान महीने का दूसरा रोजा होगा, जिसकी सहरी 5:41 बजे और इफ्तारी 6:20 बजे होगी, जबकि शनिवार को सहरी 5:40 बजे होगी। वीरवार को आल इंडिया जमात-ए-सलमानी ट्रस्ट के सूबा प्रधान आबिद सलमानी ने कहा कि करीब 13 घंटे लंबा रोजा रखने के बाद नमाजी को भूखे और प्यासे रहकर उन लोगों का एहसास होता है, जो खाने-पानी से वंचित हैं। इबादत का महीना रमजान… बुरे कर्मों से परहेज के दिन इसी महीने में कुरान शरीफ नाजिल हुआ था। यह महीना सब्र, शुक्र और आत्म-अनुशासन सिखाता है। रमजान के पांच मुख्य स्तंभ में रोजा रखना भी शामिल है। रोजा वयस्क और स्वस्थ मुसलमानों के लिए यह अनिवार्य है। इस महीने प्रत्येक मुस्लिम अपनी हैसियत के अनुसार जकात/सदका गरीबों की मदद करने के लिए खर्च करता है। रोजे में सुबह सहरी जिसमें खाना खाया जाता है। उसके बाद इफ्तारी तक न ही पानी पिया जाता है और ना ही कुछ आहार खाया जाता है, सिर्फ भूखे और प्यासे रहकर अल्लाह का शुक्र करते हुए पांच वक्त की नमाज, अपने गुनाहों से माफी मांगनी होती है। इस दौरान बुराई से दुर रहकर खुद को पाक-साफ रखा जाता है। रोजा सिर्फ खाने-पीने से ही नहीं, बल्कि झूठ बोलने, क्रोध करने और बुरे कर्मों से भी परहेज करना होता है। हालाकि बीमार, यात्री, गर्भवती या वृद्ध लोगों को रोज़ा रखने से छूट होती है। जालंधर की ज्यादातर मस्जिदों में शाम को इफ्तारी के समय लोग मिलजुल कर रोजा खोलते है और दुआ करते हैं।

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