भास्कर न्यूज | कवर्धा विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सोमवार को जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने देशभर में स्वास्थ्य अधिकार की आवाज बुलंद की। 20 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 125 से अधिक जिलों में अभियान चलाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और 18 राज्यों के मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को आठ सूत्रीय मांग पत्र कलेक्टर और एसडीएम को सौंपा गया। इस मौके पर स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों पर चर्चा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन बैठकें भी हुईं। अल्मा-आटा घोषणा पत्र में वर्ष 2000 तक सभी के लिए स्वास्थ्य का वादा किया गया था। लेकिन 25 साल बाद भी यह पूरा नहीं हो सका। जन स्वास्थ्य अभियान ने स्वास्थ्य के अधिकार को कानूनी रूप देने की मांग की है। राष्ट्रीय संयोजक चंद्रकांत यादव ने कहा कि सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना चाहिए। स्वास्थ्य बजट को जीडीपी के 2.5% तक बढ़ाना चाहिए। साथ ही खाद्य सुरक्षा, सुरक्षित पेयजल, रोजगार, महिला सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। कबीरधाम जिला मुख्यालय में भी ज्ञापन सौंपा गया। जिला प्रतिनिधि दीपक कुमार ने बताया कि सभी भारतीयों के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षित कार्य वातावरण की मांग की गई। ज्ञापन में 8 प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर रोक, सभी दवाओं को निशुल्क करना, जीवन रक्षक दवाओं पर टैक्स हटाना, स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनाना, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट अधिनियम लागू करना, सामाजिक कारकों को प्राथमिकता देना और सभी नीतियों में स्वास्थ्य को शामिल करना है।


