मप्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 70 साल पुराने ‘मप्र राज्य समाज कल्याण बोर्ड’ को भंग कर दिया है। इस पर सियासत शुरू हो गई है और 1956 से महिलाओं, बच्चों और वंचितों के लिए सुरक्षा कवच बने इस बोर्ड को बंद करने के फैसले ने अब तूल पकड़ लिया है। बीते मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने बोर्ड को खत्म करने और इसके कर्मचारियों को महिला एवं बाल विकास विभाग में मर्ज करने का आदेश दिया। इस फैसले के विरोध में सोमवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे लोकतंत्र और गरीब वर्ग पर बड़ा हमला करार दिया है। नेता प्रतिपक्ष ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि जिस बोर्ड का तीन साल का कुल बजट मात्र 4.22 करोड़ रुपए था, क्या सरकार उतनी भी राशि नहीं जुटा सकती? सिंघार ने आरोप लगाया कि इवेंट्स पर करोड़ों फूंकने वाली सरकार ने 35 हजार प्रत्यक्ष लाभार्थियों के मुंह से निवाला छीन लिया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राजस्थान, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे अन्य भाजपा शासित राज्यों में यह बोर्ड अब भी सक्रिय है, तो फिर मप्र में ही इसे क्यों निशाना बनाया गया? 28 परामर्श केंद्र बंद! सिंघार ने लिखा कि बोर्ड के भंग होने से प्रदेश भर में चल रहे 28 पारिवारिक परामर्श केंद्र बंद होने की कगार पर हैं। ये केंद्र घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए पुलिस स्टेशन जाने से पहले एक उम्मीद हुआ करते थे। अब इनके बंद होने से न केवल पीड़ित महिलाओं का सहारा छिन जाएगा, बल्कि थानों और कोर्ट में मुकदमों का बोझ भी बढ़ेगा।


