गरियाबंद जिले में समाधान शिविर में एक किसान अपनी समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों के सामने दंडवत हो गया। देवभोग विकासखंड में सुशासन तिहार के अंतिम शिविर में लाटापारा के किसान अशोक कुमार कश्यप ने बताया कि उनकी 4.28 एकड़ पुरखौती जमीन पर बड़े भाई का कब्जा है। एक साल पहले बंटवारे के लिए आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसडीएम तुलसी दास ने बताया कि पहले अशोक को उनके हिस्से का कब्जा दिलाया गया था। लेकिन दूसरा पक्ष फिर से जमीन पर काबिज हो गया। उन्होंने स्थल निरीक्षण कर स्थाई समाधान निकालने का आश्वासन दिया। देवभोग में 394 मामले लंबित बता दें कि देवभोग के तीनों राजस्व न्यायालयों में कुल 394 मामले लंबित हैं। इनमें नायब तहसीलदार के समक्ष 129, तहसीलदार न्यायालय में 185 और एसडीएम न्यायालय में 80 मामले शामिल हैं। सीमांकन के 104, क्षतिपूर्ति के 72 और खाता विभाजन के 31 प्रकरण लंबित हैं। क्षेत्र में राजस्व मामलों के निपटारे में देरी का मुख्य कारण कर्मचारियों की कमी है। तीन सर्कल में विभाजित 27 हल्कों में केवल एक आरआई और 14 पटवारी ही कार्यरत हैं। 93 राजस्व ग्रामों में राजस्व मामलों के निराकरण में जिले की स्थिति चौथे स्थान पर है। बंदोबस्त त्रुटि के मामले ज्यादा, इसलिए निराकरण में परेशानी तहसीलदार चितेश देवांगन ने बताया कि अशोक के खाते में ही 2 एकड़ जमीन दर्ज है, पुराने रिकॉर्ड के आधार पर दावा भले वे 4 एकड़ का कर रहे है। देवांगन ने बताया कि बंदोबस्त सुधार के 13 मामले दर्ज है, जिसे निराकरण किया जा रहा है। दरअसल 1991 में अंतिम बंदोबस्त हुआ है, तब की हुई त्रुटि के चलते देवभोग तहसील में जमीन विवाद से जुड़े मामले अक्सर आते हैं। बोनी के समय हर साल तहसील और थाने में जमीन विवाद के 20 से ज्यादा मामले पहुंच जाते हैं। जब तक बंदोबस्त प्रकिया दोबारा नहीं किया जाता, जमीन विवाद के मामले आते रहेंगे। आधे पटवारी पर निर्भर है विभाग देवभोग तहसील में महज 93 राजस्व ग्राम हैं। प्रशासनिक सेट अप के लिहाज से इतने गांव के लिए एक एस डी एम, एक तहसीलदार पदस्थ हैं। नायब तहसीलदार का पद खाली पड़ा है। तीन आर आई सर्कल है पर पदस्थ एक आए आई है। कुल 27 हल्के में महज 14 पटवारी हैं। राजस्व मामले के रीढ़ माने जाने वाले पटवारी की कम संख्या भी लंबित मामले का प्रमुख कारण है।


