समिति के संचालकों ने ज्ञापन सौंपा बोले- उठाव में मिलर्स की मनमानी

भास्कर न्यूज | जशपुरनगर जिले के उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी का कार्य संपन्न हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है। शासन ने सभी केंद्रों के लिए डिलीवरी ऑर्डर जारी कर दिए हैं, इसके बावजूद संबंधित मिलर्स ने अब तक धान का उठाव शुरू नहीं किया है। मिलर्स की इस कथित जानबूझकर की जा रही देरी से समितियों में रखे हजारों क्विंटल धान पर संकट गहराने लगा है। समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों ने इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई है। मौसम के बदलते मिजाज ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। इन दिनों तेज धूप के कारण खुले में रखे धान में तेजी से सूखत आ रही है, जिससे वजन में कमी हो रही है। इसके अलावा चूहे और दीमक भी धान को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई केंद्रों में भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण धान खुले या अस्थायी शेड में रखा गया है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। समिति कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द उठाव नहीं हुआ तो धान की गुणवत्ता और वजन दोनों में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा असर शासन के राजस्व और किसानों के हितों पर पड़ेगा। समिति कर्मचारियों ने धान उठाव नीति के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नीति में स्पष्ट प्रावधान है कि डिलीवरी ऑर्डर के विरुद्ध धान का उठाव केंद्र पर ही 10 प्रतिशत तौल कराकर किया जाना चाहिए, ताकि वजन को लेकर पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन कई मिलर्स इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि मिलर अपनी सुविधा के अनुसार धान उठाते हैं और बाद में धर्मकांटा की पर्ची भेजते हैं, जिसमें अत्यधिक सूखत दर्शाई जाती है। समिति कर्मचारियों का कहना है कि यदि केंद्र पर ही 10 प्रतिशत तौल की प्रक्रिया पूरी हो जाए तो बाद में वजन को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं रहेगा। कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि जानबूझकर उठाव में देरी की जाती है और प्रशासन इस पर सख्त कदम नहीं उठाता, तो भविष्य में होने वाले किसी भी आर्थिक नुकसान या सूखत के लिए समिति कर्मचारी जिम्मेदार नहीं होंगे। इस पूरे मामले को लेकर समितियों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित मिलर्स को तुरंत धान उठाव के लिए निर्देशित किया जाए, ताकि आगे किसी प्रकार की क्षति न हो। साथ ही, उठाव के समय नियमानुसार 10 प्रतिशत तौल अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और बाद में विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। समितियों ने यह भी मांग की है कि जो मिलर्स जानबूझकर देरी कर रहे हैं, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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