समीक्षा बैठक:मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की पीडब्ल्यूडी और पीएचई विभाग की समीक्षा

मुख्यमंत्री ​विष्णुदेव साय ने मंगलवार को पीडब्ल्यूडी और पीएचई विभाग की समीक्षा की। पीडब्ल्यूडी की समीक्षा के दौरान सीएम ने कहा कि खराब सड़कों के चिन्हांकन व मरम्मत के ​लिए एआई व नई तकनीक का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि आगामी तीन साल में तीस हजार करोड़ रुपए के सड़क विकास के कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य तय कर काम करें। सड़कों और पुल-पुलियों के काम आगामी पांच साल की कार्ययोजना को ध्यान में रखते हुए तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
सड़कों और बड़े पुलों के कार्यों को भू-अर्जन के बाद डेढ़-दो वर्षों में अनिवार्यतः पूर्ण करने को कहा। उन्होंने शहरों के नजदीक बनने वाले बाइपास और रिंगरोड में पर्याप्त संख्या में ओव्हरब्रिजों और अंडरब्रिजों का निर्माण करते हुए इन्हें एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर विकसित करने के निर्देश दिए। सीएम ने सभी बड़ी एवं महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए एक-एक डेडीकेटेड वरिष्ठ अधिकारी नामांकित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि नया रायपुर में विधानसभा के नए भवन का 95 प्रतिशत सिविल एवं विद्युत यांत्रिकी कार्य पूरा हो गया है। नए राजभवन का भी 60 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। जल संरक्षण के लिए “कैच द रेन” का व्यापक प्रचार करें मुख्यमंत्री ने पीएचई विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि पेयजल संकट से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने कृषि, जल संसाधन, पंचायत और वन विभागों को आपसी समन्वय के साथ “कैच द रेन” जैसे जल संरक्षण अभियानों को सुशासन तिहार के दौरान प्रचारित करने के निर्देश दिए। अब तक 86 मोबाइल यूनिट्स के माध्यम से 11,238 हैंडपंपों की मरम्मत पूरी की जा चुकी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जहां भी पेयजल से जुड़ी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, वहां तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक ली और पेयजल की उपलब्धता, भूजल स्तर, जल जीवन मिशन की प्रगति और जल संरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सरगुजा में पीएचई विभाग का मुख्य अभियंता परिक्षेत्रीय कार्यालय खोलने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने “सुशासन तिहार” के दौरान प्राप्त आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने भूजल संकट से जूझ रहे 6 जिलों के 10 विकासखंडों को लेकर चिंता जताई और कहा कि अल्पकालिक व दीर्घकालिक योजनाएं बनाकर जल संकट से निपटना होगा।

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