भास्कर एक्सपर्ट जिला में प्रत्येक वर्ष लगभग 1.25 लाख लोग डॉग बाइट के शिकार होते हैं। इसमें से लगभग 1.20 लाख लोगों को कुत्ते नोंचने तथा लगभग 5000 लोग काटने के शिकार होते हैं। बोकारो जिला में हल्के-फुल्के नोचने लोगों पर प्रति वर्ष एक लाख 20 हजार एंटी रैबीज वैक्सीन उपयोग होते हैं, पर 5000 वैसे मरीज जिनको कुत्ते ने काटकर मांस निकाल दिया है, ऐसे मरीजों के लिए सदर अस्पताल सहित किसी सरकारी अस्पताल में एंटी सीरम उपलब्ध नहीं है। इम्न्यूग्लोविन नामक वैक्सीन आज तक नहीं मिली है। ऐसे में कुत्तों के द्वारा हैवी बाइट किए गए लोगों को सिवाय रेफर के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अगर गरीब तबके के किसी व्यक्ति को हैवी बाइट होती है, तो आर्थिक तंगी के कारण वह अपना इलाज नहीं करा पाता है। चूंकि इसकी कीमत करीब 8000 रुपए हैं, इस कारण उन्हें एंटी सीरम नहीं मिल पाता है। केस-1 : सदर अस्पताल से रेफर कर दिया चास निवासी विजय दास ने बताया कि एक महीने पहले उसे एक आवारा कुत्ते ने उनके हाथ में काट लिया। एंटी सीरम लेने सदर अस्पताल पहुंचे, लेकिन नहीं होने के कारण उसे रेफर कर दिया गया। केस-2 : सदर में नहीं मिला इंजेक्शन सेक्टर-1 निवासी 45 वर्षीय कोमल को कुत्ते ने उनके हाथ में काट लिया था। सदर अस्पताल में एंटी सीरम नहीं होने की स्थिति में उसे निजी क्लीनिक में पूरा भुगतान कर एंटी सीरम लेना पड़ा। सरकारी अस्पतालों में एंटी सीरम नहीं रहने से गरीब तबके के लोगों को परेशानी हो रही है। केस-3 : बाहर से खरीदकर लगवाई झोपड़ी कालोनी निवासी एसके शर्मा ने बताया कि वह घर के बाहर बैठे थे। उसी समय एक अवारा कुत्ते ने उनके पैर में घुटने के समीप काट लिया। जब पास के सरकारी अस्पताल में वैक्सीन लेने पहुंचे तो वहां एंटी सीरम नहीं था। उन्हें बाहर से खरीदकर लगवाना पड़ा। डॉ. सुमन कुमार, पशु विशेषज्ञ एंटी सीरम के लिए कई बार पत्र लिखा है, फिर लिखा जाएगा एंटी रैबीज और एंटी सीरम में काफी अंतर होता है। एंटी रैबीज इंजेक्शन वैसे मरीजों को दी जाती है, जिन्हें कुत्तों के नाखून से खरोंच या हल्का काटने की स्थिति हो। उसे निर्धारित किए गए दिन के अनुसार रैबीज का वैक्सीन दिया जाता है। लेकिन जब किसी को काटकर मांस निकाल देता है। तो एंटी सीरम देना पड़ता है। सिटी एंकर


