सूरजपुर जिले के लटोरी तहसील कार्यालय में तैनात पटवारी बालचंद राजवाड़े को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। पटवारी ने ग्राम मदनपुर में स्थित शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में हेराफेरी की थी। पटवारी के खिलाफ यह मामला 2024 में प्रकाश में आया, जब सूरजपुर जिला प्रशासन को इस संबंध में शिकायतें मिलीं। जांच में पाया गया कि उन्होंने ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी भूमि को निजी संपत्ति के रूप में दर्ज कर दिया था। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सूरजपुर के आदेश के अनुसार, पटवारी ने मदनपुर गांव की कई शासकीय भूमि के खसरा नंबरों में छेड़छाड़ की। इन भूमि में खसरा नंबर 83/2, 84, 89, 101, 104, 105 और 108 शामिल हैं। पटवारी ने इन सभी खसरा में चिंताराम राजवाड़े का नाम दर्ज कर शिवलाल का नाम अंकित किया। पटवारी ने शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में की हेराफेरी इसी तरह खसरा नंबर 66, 48, 67, 68 और 57 में भी हेराफेरी की गई। इन शासकीय भूमि को प्रकाश समद्दार के नाम पर दर्ज किया गया। बाद में इन्हें प्रकाश समद्दार आत्मज शैलेंद्र समद्दार, निवासी किशुनपुर, तहसील अंबिकापुर के नाम कर दिया गया। पटवारी ने खसरा नंबर 58, 168 और 109 की शासकीय भूमि को पहले सुखरंजन हालदार और फिर विभा सिंह के नाम पर दर्ज कर दिया। सभी खसरा छोटे झाड़ जंगल की श्रेणी में थे। पटवारी ने इन सभी परिवर्तनों के लिए कोई आदेश की प्रति संलग्न नहीं की। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1968 के तहत कार्रवाई करते हुए अनुविभागीय अधिकारी ने 1 अप्रैल 2025 को पटवारी को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। पटवारी पर व्यक्तिगत लाभ के लिए ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप है।


