अलवर में सरकारी शिक्षक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। टीचर के पास से 4 पेज का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लिखा है कि मैं बहुत बुरी स्थिति से गुजर रहा था। मैं अत्यंत दुखी हो गया था। मुझे प्रताड़ित भी किया जाता था। टीचर और प्रिंसिपल कहते थे- यह कार्य आप कैसे भी करो, हमें पता नहीं, आप जानो, आपका काम जाने। मेरा मजाक भी उड़ाया जाता था। शराब पीकर गाली देते थे। टीचर ने फरवरी 2026 से अप्रैल 2026 तक काम का प्रेशर बताते हुए लिखा- मैं चार्ज कब देता और रिटायरमेंट के कागज कब तैयार करता। सुसाइड नोट में स्कूल के शिक्षकों और प्रिंसिपल पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। टीचर का 5 महीने बाद रिटायरमेंट था। घटना अकबरपुर थाना क्षेत्र के निर्भमपुरा गांव में रविवार दोपहर 2 बजे की है। टीचर ने घर से 100 मीटर दूर बाड़े की टीन शेड में आत्महत्या की है। शिक्षक का शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। एएसआई प्रकाश चंद ने बताया- परिवार की तरफ से शिकायत आई है। मामले की जांच की जा रही है।
टीचर ने सुसाइड नोट में लिखीं ये 7 बातें… 1. 30 जून 2026 को रिटायर्ड होने वाले थे टीचर बड्डन लाल बलाई (59) ने सुसाइड नोट में लिखा- मैं गांव निर्भमपुरा, अकबरपुर पंचायत समिति, तहसील मालाखेड़ा, जिला अलवर, राजस्थान का निवासी हूं। मैं वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेहलावास, पंचायत समिति उमरेण, जिला अलवर में अध्यापक पद पर 25 साल से कार्यरत हूं। मेरी राजकीय सेवा करीब 38 साल होने को है। मेरी सेवा निवृत्ति 5 महीने बाद 30 जून 2026 को होने वाली थी। मैं चार-पांच साल से मानसिक, बौद्धिक और शारीरिक रूप से पीड़ित हूं। आज से 4-5 साल पहले मेरे बड़े बेटे की शादी थी। शादी से 2 दिन पहले जबरदस्त माइंड स्ट्रोक आया था, जिससे शरीर के आधे हिस्से में पैरालाइसिस हो गया था, मुंह टेढ़ा हो गया था और आंखों की रोशनी भी बहुत कम हो गई थी। मुझे चलने में कमरे के दरवाजे तक का भी पता नहीं चलता था।
2. बेटे की बारात में भी नहीं जा सका
टीचर बड्डन लाल मे सुसाइड नोट में लिखा- बेटे की शादी थी इसलिए दवाइयां लेकर मुझे घर पर ले आए, वहां पर इलाज शुरू किया। मैं अपने बेटे की बारात में भी नहीं जा सका। मेरा बेटा दूल्हा बनकर बारात में रोता ही चला गया, क्योंकि मुझे होश नहीं था। मेरे रिश्तेदार, जो स्थानीय कंपाउंडर थे और एक रिश्तेदार जो एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर में कंपाउंडर थे, उनको मेरी देखरेख के लिए घर पर मेरे पास छोड़ दिया। बारात लौटने के बाद न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर पंकज शर्मा को दिखाया, लेकिन कोई आराम नहीं मिला। इसके बाद मुझे जयपुर लेकर गए। वहां पर SMS हॉस्पिटल की डॉक्टर भावना शर्मा (न्यूरोलॉजी) को दिखाया। उन्होंने गंभीर स्थिति बताई और कहा- पेशेंट की स्थिति खराब है, पागल भी हो सकता है, नस भी फट सकती है। बौद्धिक स्थिति कमजोर रहेगी, अधिक सुधार नहीं हो सकता, दवाइयां पूरे जीवन लेनी होंगी। 3. कुछ भी समझ नहीं आता कि क्या करना है टीचर ने लिखा- मेरी उम्र 60 साल होने को है। मुझे कुछ भी समझ नहीं आता कि क्या करना है, कैसे करना है, कुछ पता नहीं लग पाता है। अब जांच करवाई तो जांच में 30 प्रतिशत सुधार बताया है, लेकिन मेरे कुछ भी समझ में नहीं आता। मेरे पास 600 HPL (हाफ पे लीव) अवकाश हैं और मेरी सेवा निवृत्ति से पूर्व 115 दिन वर्किंग डे हैं, वह भी नहीं ले पा रहा हूं। मैं गंभीर स्थिति से गुजर रहा हूं, लेकिन मेरी सुनने वाला कोई भी नहीं है। मेरे तीन बेटे हैं, पढ़े-लिखे हैं और नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। मेरे परिवार में 11 सदस्य हैं, इसलिए मैं अनिवार्य सेवानिवृत्ति भी नहीं ले पाया, क्योंकि इस समय वे सभी मेरे पर आश्रित हैं। प्रधानाचार्य सुनीता बाई, उसके बाद प्रधानाचार्य गायत्री जी और इसके बाद प्रधानाचार्य ए.के. मिश्रा जी से मैंने अनुरोध किया कि मेरी मानसिक स्थिति बहुत खराब है। मेरी 30 जून 2026 को सेवा निवृत्ति भी है, इसलिए मेरा कार्यभार किसी भी अध्यापक को दिलवा दो, पर मेरी सुनने वाला कोई नहीं है। मेरे पास निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का PEEO ढेहलावास नोडल के 8 विद्यालयों का कार्यभार है। इसके अलावा स्वयं के विद्यालय के कक्षा 1 से 12 तक का चार्ज है। इसी प्रकार वर्क बुक एवं लाइब्रेरी का चार्ज भी PEEO नोडल के 8 विद्यालयों का और स्वयं के विद्यालय का चार्ज भी मेरे पास है, लेकिन इस चार्ज को कोई लेने को तैयार नहीं है। 4. सोच-सोचकर रात को नींद नहीं आ रही थी सुसाइड नोट में लिखा- मैं बहुत बुरी स्थिति से गुजर रहा था। जो मानसिक हालत में थोड़ा-बहुत सुधार था, वह भी नहीं रहा। सोच-सोचकर रात को नींद नहीं आ रही थी, मेरा खाना-पीना छूट गया था। मैं अत्यंत दुखी हो गया था तथा मुझे प्रताड़ित भी किया जाता था। कहते थे- यह कार्य आप कैसे भी करो, हमें पता नहीं, आप जानो आपका काम जाने। मेरा मजाक भी उड़ाया जाता था। निशुल्क पाठ्यपुस्तक, वर्क बुक, लाइब्रेरी बुक लाने में सत्र 2025-26 में स्वयं के पैसे खर्च कर 20 चक्कर लगाए। इतने दिन इन सामग्री को अधीनस्थ विद्यालयों और स्वयं के विद्यालयों में बांटने में लगे। सुसाइड नोट में लिखा- कक्षा 1 से 5 में पढ़ाने वाला कोई नहीं था। केवल एक अध्यापिका सीमा गुप्ता थीं, लेकिन उनके बच्चों से कोई लेना-देना नहीं था। कोई बच्चा विद्यालय आए या न आए, वे उपस्थिति भी दर्ज नहीं कर पाती थीं। 5. मेरी किसी ने भी नहीं सुनी
सुसाइड नोट में लिखा- मैंने अपने चार्ज के बारे में प्रधानाचार्य सुनीता बाई से भी अनुरोध किया कि मैडम मेरी मानसिक हालत खराब है और मेरा रिटायरमेंट भी है, इसलिए किसी भी कार्मिक को मेरा चार्ज दिलवा दो। लेकिन मेरी कुछ भी नहीं सुनी और कहा- कैसे भी करो, मैं किसी से नहीं कहती, आप जानो आपका काम जाने, मैं तो ट्रांसफर कराकर चली जाऊंगी, आने वाला जाने। अक्टूबर 2025 में प्रधानाचार्य गायत्री जी से अनुरोध किया, तो उन्होंने कहा- मैं तो जल्दी में प्रमोशन लेकर चली जाऊंगी। सीमा गुप्ता को सत्र 2024-25 के रिजल्ट की कोई परवाह नहीं थी, उन्होंने रिजल्ट बनाया भी नहीं। कहती- मुझे कोई परवाह नहीं, अनिल जी जाने उसका काम जाने। कहती- मुझे कोई परवाह नहीं, मेरी जानकारी और पावर ऊंची हैं। 6. शराब पीकर गाली-गलौज करते थे सत्र 2024-25 में कक्षा 1 के अध्यापक प्रत्येकेंद्र सिंह और कक्षा 5 के अध्यापक रोशन लाल ने रिजल्ट बनाना जरूरी नहीं समझा। मैंने उनसे कहा- भाई ऑनलाइन तो मैं कर दूंगा, जबकि इन कक्षाओं के क्लास टीचर वही थे और परीक्षा प्रभारी भी वही थे। उन्होंने कहा- हम कुछ भी नहीं करेंगे, हमारी जानकारी और पहुंच ऊंची है। वे शराब पीकर गाली-गलौज करते थे और कहते थे- हमारी कलेक्ट्रेट और शिक्षा विभाग में पहुंच बहुत ऊंची है, हम तेरी नौकरी खा जाएंगे, रिटायरमेंट नहीं लेने देंगे। कहा- तुम दोनों बहुत खतरनाक आदमी हो। जब परीक्षा प्रभारी अनिल कुमार एवं प्रधानाचार्य कुछ नहीं कह रहे तो तू क्यों याद दिलवाता है। ऐसा ही जवाब सीमा गुप्ता अध्यापिका ने दिया, तो मैं चुप हो गया। अनिल कुमार परीक्षा प्रभारी ने मुझे परीक्षा फल लाकर नहीं दिया।
7. मुझे आत्महत्या करने को मजबूर किया मैं ऐसी स्थिति में अवकाश भी नहीं ले पा रहा था। प्राथमिक कक्षा को अध्यापन कराने वाला कोई नहीं था, न बच्चों का रिजल्ट बनाने वाला, न कोई मेरी मदद करने वाला, न कोई मेरा चार्ज लेने वाला। मैं रिटायरमेंट के कागज बनवाने के लिए भी छुट्टी नहीं ले पा रहा था। माइंड स्ट्रोक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मेरे पास चिंतन-मनन करने की भी क्षमता नहीं बची थी। मैं ईश्वर से, परमपिता परमात्मा से यही अनुरोध करता हूं कि उन दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और शिक्षा विभाग भी इन दोषी लोगों पर कार्रवाई करे, जिन्होंने मुझे आत्महत्या करने को मजबूर किया। यह मेरा अंतिम अनुरोध है। मैं इन सारी परिस्थितियों से जूझकर आत्महत्या करने को मजबूर हुआ हूं। मेरे छोटे भाई मामचंद, बड़े भाई का लड़का सुरेंद्र कुमार, मेरे तीनों बेटे, तीनों पुत्रवधुएं, मेरी प्यारी-सी सभी पोतियां एवं मेरी धर्मपत्नी संतोष देवी को बहुत-बहुत प्यार और मेरा अंतिम प्रणाम। जो मैंने इन परिस्थितियों में कदम उठाया है, मुझे माफ करना। सभी ग्रामवासियों को मेरा अंतिम राम-राम जी।


