राजधानी भोपाल में इन दिनों मध्यप्रदेश सरकार का अंतरराष्ट्रीय वन मेला चल रहा है, लेकिन यहां का नजारा कुछ अलग ही दिखा। वन उत्पादों से सजी दुकानें तो यहां है ही, कुछ टोने टोटके के स्टॉल भी नजर आए। इन स्टॉल्स पर 250 रु. से लेकर 1100 रु. कीमत की अलग-अलग धातुओं की अंगूठियां बेची जा रही है। दावा किया जा रहा है कि इन्हें पहनने से शादी की समस्या दूर होंगी, संतान प्राप्ति होगी, आसानी से नौकरी मिल जाएगी। गृह क्लेश दूर होगा। जीवन में सुख शांति और समृद्धि आएगी। लोगों ने इन स्टॉल्स को लेकर अंधविश्वास फैलाने के आरोप लगाए। वन मेला प्रबंधन ने शिकायतों के बाद दुकानदारों को अंगूठियां और अंधविश्वास फैलाने वाले पोस्टर हटाने के लिए कहा। भास्कर ने जाकर हकीकत देखी तो दुकानदार चोरी छिपे इन अंगूठियों को अभी भी बेच रहे हैं। पढ़िए रिपोर्ट अंगूठियों को लेकर ये दावा किया जा रहा
गुरुवार, 19 दिसंबर को जब भास्कर ने मेले का दौरा किया, तो 12 से अधिक स्टॉल पर यह अंगूठियां बेची जा रही थीं। दुकानों पर बड़े-बड़े पोस्टरों में लिखा था- ये अंगूठियां “संतान प्राप्ति, वास्तु दोष निवारण, शादी में बाधाएं दूर करने, आर्थिक संकट समाप्त करने और मानसिक-शारीरिक शांति” के लिए प्रभावी हैं। इन अंगूठियों को बेचने वाले दुकानदार भी ग्राहकों के सामने इसी तरह से मार्केटिंग कर रहे थे। इनकी कीमत ₹250 से ₹1,100 तक है। विक्रेताओं का दावा है कि ये अष्ट धातुओं की बनी हैं। इनमें तांबा, पीतल, सोना और अनेक धातु मिली हुई हैं। एक ऐसा पदार्थ है जो इन धातुओं को आपस में जोड़ता है। खास बात ये है कि न केवल आम लोग बल्कि सरकारी कर्मचारी और पुलिसकर्मी भी इन अंगूठियों को खरीदते हुए देखे गए। वन उत्पाद बेचने के नाम पर मेले में एंट्री
वन मेले में हिस्सा लेने वाले लोग केवल वन उत्पाद के ही स्टॉल लगा सकते हैं। अंगूठी बेचने वाले दुकानदारों के स्टॉल पर रुद्राक्ष और तुलसी की माला और चंदन भी है। जो वन प्रोडेक्ट की कैटेगरी में आते हैं। इसी की आड़ में इन्होंने स्टॉल लगाने की अनुमति ली। प्रशासन को भनक लगी तो दूसरे दिन हटा दिए पोस्टर
शुक्रवार यानी 20 दिसंबर को मेला प्रबंधन को इन स्टॉल के बारे में जानकारी लगी तो प्रबंधन ने इन स्टॉल पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले पोस्टर हटवा दिए। जो अंगूठियां बाहर रखी गई थीं उन्हें भी हटवा दिया, लेकिन अभी भी दुकानदार इनकी चोरी छिपे बिक्री कर रहे हैं। उत्तराखंड से आए एक विक्रेता ने कहा कि हम लोग हर साल ये अंगूठियां लेकर वन मेले में आते हैं। 19 दिसंबर तक हमने इन्हें खुलेआम बेचा। अब लोग सवाल उठा रहे हैं तो हम केवल इच्छुक लोगों को ही इन्हें बेच रहे हैं। दुकानदार खुद भी नहीं देते फायदे की गारंटी
इसी तरह का स्टॉल लगाने वाले सुधीर अग्रवाल चित्रकूट के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वह इन धातु की अंगूठियों की गारंटी नहीं लेते हैं। ये अंगूठियां स्वास्थ्य और शारीरिक लाभ के लिए बनाई गई हैं। यह सभी धातुओं के मिश्रण से बनी हुई हैं। लोग इन्हें ले जाते हैं, फायदा होता है तो और खरीदते हैं। वे बताते हैं कि हम 2017 से यहां आ रहे हैं। उत्तराखंड से ही आए प्रमोद मिश्रा पिछले दो साल से वन मेला में स्टॉल लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “पहले हम यह अंगूठियां बेचा करते थे, लोग इसे खरीदने भी आते थे। लेकिन अब हमें इसे बेचने से मना कर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि वन मेले में इन राशि की अंगूठियों का क्या काम है। हमने इन्हें हटा दिया है। उत्तराखंड के ऋषिकेश से आए राजेश तिवारी ने बताया कि उन्हें वन मेले के लिए विशेष रूप से बुलाया गया था। वे रुद्राक्ष और पूजा-पाठ से जुड़े यंत्र बेच रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे ग्रहों को संतुलित करने और बढ़ाने में ये यंत्र काम आते हैं। हम अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग यंत्रों का उपयोग करते हैं। मेला प्रबंधन बोला- आगे से ध्यान रखेंगे ऐसा न हो
भास्कर ने जब वन मेले के एमडी विभाष ठाकुर से बात की तो उन्होंने कहा, मेले में 300 स्टॉल वन उत्पादों से जुड़े हैं। 20 स्टॉल उपचार के लिए हैं। उनसे पूछा कि रत्नों के स्टॉल कैसे लगे? तो बोले कि हमने धातु की अंगूठियों की बिक्री की अनुमति नहीं दी थी। जब हमें इस बारे में जानकारी मिली, तो औचक निरीक्षण किया और जो पोस्टर थे, उन्हें हटवा दिया। इन लोगों ने जो टेंडर भरे थे उसमें फॉरेस्ट से जुड़े प्रोडक्ट के बारे में जानकारी दी थी, इसलिए इन्हें मेले में आने की अनुमति दी गई है।


