सरकारी योजना खाद्यान्य वितरण में आवंटित चावल में मिले गिल्ली और कीड़े
राजनगर। शासकीय उचित मूल्य की दुकान क्रमांक 1 ने इतिहास रच दिया है। अब तक आप सरकार से सस्ता राशन मांगते थे। अब सरकार आपको बोनस में कीड़े भी दे रही है। हां, यही ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्वच्छ भारत’ के नए पैकेज में मिलने लगा है। चावल के साथ इल्ली और कीड़ा फ्री ग्रामीणों ने जब चावलों की बोरी खोली तो लगा। कि शायद किसी बायोलॉजिकल प्रयोगशाला से डिलीवरी आ गई है। चावल में चलती-फिरती जिंदगियों को देखकर गांव वालों ने पहले तो “जादू” समझा, फिर जब दस्त और उल्टियों की चमत्कारी श्रृंखला शुरू हुई। तब समझ में आया कि ये ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ नहीं, ‘डायरेक्ट कीड़ा ट्रांसफर’ है।
सेल्समैन बोले जो सरकार भेजती है, वही खिलाते हैं।
जब जनता ने गुस्से में दुकान का रुख किया और जवाब माँगा, तो सेल्समैन का जवाब इतना साफ और कटा हुआ था कि प्याज काटने की जरूरत ही नहीं रही “सरकार ही कीड़े वाले चावल भेजती है, तो हम क्या ताजमहल परोसें?” वाह सरकार! अब तो झूठ बोलने की भी जरूरत नहीं बची। अधिकारी खुलेआम कबूल कर रहे हैं, कि जो भेजा जाता है, वही परोसा जाता है फिर चाहे वो राशन हो या भ्रष्टाचार!
राशन वितरण या धीमा जहर वितरण योजना?
एक तरफ सरकार पोषण आहार की बातें करती है, दूसरी तरफ थाली में फंगल-फ्रेंडली चावल परोसती है। लगता है सरकार अब हेल्थ सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सीधे लोगों को बीमार कर रही है ताकि अस्पतालों की ओपीडी में भीड़ बनी रहे, डॉक्टरों की नौकरी पक्की रहे और फार्मा कंपनियों के शेयर चढ़ते रहें।
जनता कहती है अब हम सिर्फ राशन नहीं, इंसाफ भी खाएंगे
गांव वालों ने चेतावनी दी है, कि अगर अब भी जांच नहीं हुई, तो वे चावल की बोरी नहीं, लाठी लेकर निकलेंगे। आखिर कब तक सिस्टम की थाली में जहर परोसा जाएगा? क्या मुख्यमंत्री जी अगली बार खुद आकर चखेंगे ‘सरकारी खिचड़ी’? इस पूरे प्रकरण से साबित होता है, कि सरकारी योजनाएं अब कागज पर नहीं। थाली में कीड़े बनकर परोसी जा रही हैं। जनता सिर्फ राशन नहीं मांग रही, अब सवाल पूछ रही है। और सवाल जब सड़कों पर आते हैं, तो जवाब देना ही पड़ता है, चाहे सरकार को घुटनों पर आना पड़े या भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे।


