जयपुर। राजस्थान में सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और स्कूल से वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग 25 मार्च से प्रवेशोत्सव सघन अभियान शुरू करेगा। इसके तहत शिक्षकों को गांव-मोहल्लों में घर-घर जाकर सर्वे करना होगा और ऐसे बच्चों की पहचान करनी होगी जो स्कूल से बाहर हैं या पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। कोरोना काल के बाद से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में कमी आई है। ऐसे में शिक्षा विभाग इस बार नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है। इसी कारण सरकारी स्कूलों में भी 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों का प्रवेश कराया जा सके। 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों की होगी पहचान शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार अभियान के दौरान 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी जो स्कूल में नामांकित नहीं हैं या पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। सर्वे के दौरान इन बच्चों का डेटा डिजिटल प्रवेशोत्सव ऐप में दर्ज किया जाएगा। चार दिन चलाया जाएगा विशेष सघन अभियान अभियान को प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने 27 मार्च, 6 अप्रैल, 10 अप्रैल और 15 अप्रैल 2026 को विशेष सघन अभियान दिवस घोषित किया है। इन दिनों शिक्षकों की टीमें गांवों और शहरों के मोहल्लों में जाकर अभिभावकों से संपर्क करेंगी और बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित करेंगी। टीचरों की टीम बनाएंगे पीईईओ और यूसीईईओ अभियान के संचालन के लिए पीईईओ और यूसीईईओ अपने क्षेत्र के शिक्षकों व कर्मचारियों की टीमें बनाएंगे। ये टीमें पंचायत क्षेत्र के सभी घरों का सर्वे कर अनामांकित, ड्रॉपआउट और प्रथम प्रवेश योग्य बच्चों की सूची तैयार करेंगी। 25% स्टाफ करेगा सर्वे, 75% स्कूल में रहेगा निर्देशों के अनुसार अभियान दिवस पर 25 प्रतिशत स्टाफ घर-घर सर्वे करेगा, जबकि 75 प्रतिशत कर्मचारी विद्यालय में नियमित कार्य संभालेंगे। बाद के चरणों में अन्य कर्मचारियों को भी सर्वे कार्य में लगाया जाएगा। जिला और राज्य स्तर पर होगी निगरानी अभियान की निगरानी के लिए जिला और राज्य स्तर के अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। वे सर्वे की गुणवत्ता, डेटा एंट्री और नामांकन की स्थिति की समीक्षा करेंगे। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।


