दौसा में केंद्र और राज्य सरकार के बजट में श्रमिक वर्ग की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में रैली निकालकर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन के जरिए ज्ञापन सौंपा गया। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि विभिन्न विभागों और योजनाओं में कार्यरत श्रमिक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार स्तर पर ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित दर्जा देने की मांग प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से नियमित कर्मचारियों की तरह कार्य लेने के बावजूद उन्हें अब तक योजना कर्मी का दर्जा दिया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से मानदेय वृद्धि पर निर्णय नहीं होने से असंतोष बढ़ रहा है। इसके अलावा मिड-डे मील और आशा कार्यकर्ताओं को भी कम मानदेय पर काम करने को मजबूर बताया गया। बिजली, पेंशन और बैंक कर्मचारियों की भी लंबित मांगें संघ ने बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण का विरोध करते हुए कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर करने की मांग की। ईपीएस-95 योजना के तहत न्यूनतम पेंशन एक हजार रुपए होने को अपर्याप्त बताते हुए इसमें बढ़ोतरी की मांग उठाई गई। बैंक कर्मचारियों की पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग को भी लंबित बताया गया। बार-बार उठाए मुद्दे, नहीं हुई सुनवाई जिला मंत्री महेश कुमार शर्मा ने कहा – संगठन समय-समय पर श्रमिकों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय सरकार के सामने रखता रहा है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में श्रमिक और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।


