प्रदेश की 10 नगर निगम, 49 नगर पालिकाओं और 114 नगर पंचायत समेत 173 निकायों में मंगलवार को मतदान हुआ। इनमें औसतन 72.33 प्रतिशत वोट पड़े। फाइनल फिगर आने पर आंकड़ा बढ़ेगा। पिछली बार 67.35% मतदान हुआ था। यानी पिछली बार से इस बार औसत मतदान 5.2% बढ़ा है। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में अच्छा मतदान हुआ, जबकि रायपुर-बिलासपुर जैसे शहरी इलाकों में विधानसभा चुनाव की तरह कम उत्साह नजर आया। मतदान के दौरान रायपुर, बिलासपुर समेत कई निकायों में झड़पें और अव्यवस्था नजर आई। राजधानी में आखिरी समय भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। भाजपा ने आरोप लगाया कि समय खत्म होने पर भी कुछ लोगों को अंदर जाने दिया गया। बता दें कि 10 नगर निगम में 79 मेयर प्रत्याशी मैदान हैं। रायपुर में सबसे ज्यादा 16 प्रत्याशी हैं। जबकि 1,889 लोग पार्षद का चुनाव लड़ रहे हैं। नतीजे 15 को आएंगे। शतायु वोटर भी पहुंचे
बुजुर्गों में वोट डालने का उत्साह दिखा। सूरजपुर जिले के विश्रामपुर में 104 साल की सकीना बेगम, 100 साल की कलादेवी ने भी मतदान किया। दोनों परिजन के सहारे वोट देने पहुंची थी। धमतरी में बुजुर्ग दंपती इतवारी राम पत्नी अनुसूइया देवांगन के साथ वोट डालने आए। कम वोटिंग से चढ़ा सियासी पारा, दलों ने आयोग पर मढ़ा दोष रायपुर समेत कुछ नगर निगमों में कम वोटिंग से सियासी पारा चढ़ गया है। लोगों ने राजनीतिक दलों के नेताओं से इसकी शिकायत भी की। भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य दल इसके लिए हाल में परिसीमन को बड़ा कारण बता रहे हैं। रायपुर में दोनों बड़े दलों ने तो कहा कि ऐसा लगता है कि कमरे में बैठकर वार्डों का परिसीमन किया गया है। अफसरों ने कमरे में बैठकर किया वार्डों का परिसीमन: भाजपा
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजीव चक्रवर्ती ने बताया कि जीवन में पहली बार ऐसा विसंगति पूर्ण चुनाव देखा है। पोलिंग सेंटर पर जिस तरह से लोग मतदान के लिए भटक रहे थे और शिकायत कर रहे थे। ऐसा लगता है कि अफसरों ने कमरे में बैठकर वार्डों का परिसीमन किया है। रैंडम थ्योरी पर किए गए इस परिसीमन की वजह से लोग बहुत परेशान हुए। एक ही परिवार के लोगों का अलग- अलग वार्डों में मतदान केंद्र था। इस तरह की परेशानियों की वजह से बहुत से लोग निराश और नाराज होकर मतदान केंद्रों से वापस हुए। गड़बड़ियों के कारण 2.5 लाख लोग वोट नहीं डाल सके: कांग्रेस
इस तरह की नाराजगी कांग्रेस ने भी जताई। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि विसंगतिपूर्ण परिसीमन के कारण बहुत से लोग वोट नहीं डाल पाए। रामकुंड में पहले जिसका नाम था, बाद में पता चला कि उसे तात्यापारा के मतदान केंद्र पर वोट डालना है। यही नहीं हर वार्ड में एक दो ईवीएम मशीनें खराब हुईं। शहीद चूड़ामणि नायक वार्ड, आत्मानंद वार्ड में भी ऐसा ही हुआ। इस तरह की गड़बड़ियों के कारण लगभग 2.5 लाख लोग मतदान नहीं कर पाए। बूथ बदले, भटकते रहे वोटर, पूर्व राज्यपाल बैस को भी जाना पड़ा घर से दूर
ईवीएम खराब, वोटरलिस्ट में गड़बड़ी, नाम छूटने, नाम न मिलने, जगह बदलने की शिकायतें अधिकांश वार्डों में सामने आईं। कई को शिकायत थी कि उनके परिवार के लोगों के नाम अलग-अलग बूथों पर शिफ्ट कर दिए गए हैं। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने एक ही बूथ पर वोट डाले थे। पूर्व राज्यपाल रमेश बैस का नाम रविनगर के बूथ में है, लेकिन उन्हें वोट डालने शहीद स्मारक के बूथ जाना पड़ा। कटोरातालाब निवासी सनी आईजक पीठासीन अधिकारी से शिकायत करते रहे कि उनका बूथ अलग और परिजन का बूथ अलग है।


