सरगुजा में सहकारी बैंक से पैसा निकालने किसान परेशान:किसानों ने लाखों का धान बेचा, बैंक से लाइन लगाकर मिल रहे 20 हजार

सरगुजा जिले में धान बेचने वाले किसानों को सहकारी बैंक से पैसा निकालने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। किसानों को दिनभर लाइन में लगने के बाद मात्र 20 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। सहकारी बैंक में किसानों की लंबी लाइन लग रही है। बैंक में कर्मचारियों की कमी के कारण भी किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। सहकारी बैंक प्रबंधन का कहना है कि बैंकों को लिमिट में रुपये मिल पाने के कारण यह स्थिति बन रही है। सरगुजा में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को अपना पैसा निकालने के लिए धक्का खाना पड़ रहा है। शुक्रवार को सहकारी बैंक के आकाशवाणी चौक की शाखा में किसानों की लंबी लाइन लगी रही। किसानों ने पैसा मिलने में हो रही दिक्कतों से अधिकारियों को अवगत कराया। किसानों ने बताया कि रोज पैसा निकालने के लिए लंबी लाइन में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। 20 हजार रुपये ही निकाल पा रहे किसान
बैंक में लंबी लाइन में लगे किसानों ने बताया कि उन्होंने लाखों रुपये का धान बेचा है, लेकिन बैंकों से मात्र 20 हजार रुपये का नगद आहरण दिया जा रहा है। इसके लिए भी उन्हें घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। बैंक में एक बार 20 हजार रुपये निकालने के बाद उन्हें चार दिन बाद अपना पैसा निकालने के लिए कहा जाता है। इससे किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि जिनके घरों में शादी है, उन्हें भी ज्यादा पैसा नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण किसान परेशान हो रहे हैं। आकाशवाणी चौक स्थित सहकारी बैंक के प्रबंधक ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण वे एक ही काउंटर पर काम कर पा रहे हैं, जिसके कारण किसानों को लाइन में लगना पड़ रहा है। नगदी की कमी के कारण दिक्कत
सहकारी बैंक के एडिशनल सीईओ बीकेपी सिंह ने बताया कि सहकारी बैंकों के लिए नगदी की दिक्कत है। हम प्रतिदिन एक शाखा को अधिकतम दो करोड़ रुपये ही नगद उपलब्ध करा पा रहे हैं। इससे अधिक नगदी सरकारी एवं निजी बैंकों से रोज नहीं मिल पा रही है। बीकेपी सिंह ने कहा कि किसानों को सहकारी बैंक द्वारा चेक, एटीएम एवं RTGS की सुविधा भी दी गई है। इसका लाभ किसान नहीं उठाना चाहते हैं। इसके अलावे किसान अपना पैसा सहकारी बैंकों के खातों में नहीं रखना चाहते, यह बड़ी दिक्कत है। सहकारी बैंकों से पैसा निकालकर किसान दूसरे बैंक खातों में रकम जमा कराते हैं। जबकि सहकारी बैंक सबसे ज्यादा ब्याज दे रही है।
बीकेपी सिंह ने कहा कि किसानों को जरूरत के अनुसार नगद रकम देने की व्यवस्था की जा रही है। फिलहाल कर्मचारियों की कमी एवं नगदी की अनउपलब्धता के कारण यह स्थिति बन रही है।

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