सरगुजा DFO कार्यालय का घेराव, जमकर नारेबाजी:महामाया पहाड़ से हटाया गया था अतिक्रमण, प्रदर्शनकारियों का दावा-जमीन नजूल की

अंबिकापुर के महामाया पहाड़ में फारेस्ट लैंड से अतिक्रमण हटाने में प्रभावित हुए 40 परिवारों के लोगों ने DFO कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। DFO से हाईकोर्ट के आदेश के तहत जमीन का सीमांकन किए जाने की मांग की है। जिनके कब्जे हटाए गए हैं, उनका दावा है कि मेंटनेंस खसरा में उक्त भूमि नजूल के पहाड़ चट्टान मद में दर्ज है। DFO ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। जनवरी 2025 में वनविभाग ने महामाया पहाड़ पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करते हुए 60 लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया और 24 घंटे से भी कम समय में कार्रवाई करते हुए 40 घरों को तोड़ दिया। दोपहर बाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के मौखिक आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रोक दी गई थी। सड़क पर परिवार, डीएफओ कार्यालय पहुंचे प्रभावित
अतिक्रमण हटाए जाने से प्रभावित लोगों ने नवागढ़ स्कूल के पास मैदान में शरण ली। प्रभावितों का दावा है कि आज भी कई परिवार टेंट लगाकर रह रहे हैं। प्रभावितों ने सोमवार को डीएफओ कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। प्रभावित परिवारों ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर जमीन का सीमांकन कराने की मांग रखी। प्रदर्शनकारियों के साथ पहुंचे अधिवक्ता अनवारूल हक फिरदौसी ने दावा किया कि हाईकोर्ट ने डीएफओ के नेतृत्व में टीम बनाकर जमीनों का सीमांकन करने का आदेश दिया है। अनवारूल हक फिरदौसी ने दावा किया कि जिस भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है, वह मेंटनेंस में नजूल के पत्थर चट्टान मद में दर्ज है। वनविभाग उक्त भूमि को रिजर्व फारेस्ट का बताकर कार्रवाई की है। चूंकि वनविभाग के अधिकारी फंस गए हैं, इसलिए वे जांच एवं सीमांकन करने से बच रहे हैं। 24 लोग पहुंचे थे हाईकोर्ट
अतिक्रमण हटाने से प्रभावित 24 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। डीएफओ तेजस शेखर ने बताया कि इसमें हाईकोर्ट द्वारा डीएफओ के समझ पक्ष रखने कहा है। हम हाईकोर्ट के निर्देश के आधार पर पक्षकारों का बयान दर्ज कर रहे हैं। पूरी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा रही है। DFO बोले-भूमि फारेस्ट की, कार्रवाई जायज
मामले में DFO तेजस शेखर ने कहा कि पूरी भूमि फारेस्ट की है। हमने हाईकोर्ट के समक्ष नोटिफिकेशन भी प्रस्तुत कर दिया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए यह ऑर्डर जारी किया है। यह है मामला
भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे की शिकायत पर जिला प्रशासन, वन विभाग के संयुक्त अमले ने साल 2021 में महामाया पहाड़ में सर्वे कराया। सर्वे के दौरान 440 लोगों का अतिक्रमण पाया गया। 15 अक्टूबर 2022 को 60 अतिक्रमणकारियों का कब्जा हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन राजनीतिक दबाव में यह कार्रवाई रुक गई थी। इन 60 कब्जाधारियों को जनवरी 2025 में नोटिस जारी कर बेजा कब्जा खाली करने का नोटिस दिया गया और वनविभाग ने कार्रवाई करते हुए राजस्व एवं पुलिस फोर्स के साथ बेजा कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की। इसमें 40 लोगों का कब्जा तोड़ दिया गया है।

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