पिछले साल मई में बसवाराजू के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी को नक्सल संगठन का अगला महासचिव माना जा रहा था। नक्सलियों की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा होती, इससे पहले ही देवजी ने अपने 18 साथियों के साथ तेलंगाना में सुरक्षा बलों के सामने घुटने टेक दिए हैं। नक्सल आंदोलन के लिए इस आत्मसमर्पण को सबसे बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। देवजी संगठन के सबसे वरिष्ठ नेताओं में था। 2025 में पूर्व महासचिव बसवाराजू के मारे जाने के बाद उसी का नाम सामने आया था। देवजी (60 वर्ष) ने न केवल पार्टी के रणनीतिक निर्णयों में अहम भूमिका निभाई, बल्कि युद्ध कला और माओवादी आंदोलनों के समन्वय में भी गहरी पैठ बना रखी थी। उसके सरेंडर को नक्सल संगठन के नेतृत्व गिरने और लाल किले की दीवार ढहने जैसा करार दिया जा रहा है। देवजी ने तेलंगाना के मुलुगु जिले में पुलिस और एसआईबी के सामने हथियार डाल दिए। उसके साथ 18 से ज्यादा अन्य माओवादी नेताओं और कैडरों ने भी सरेंडर किया। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने की घोषणा और सख्त सुरक्षात्मक रणनीति ने नक्सल संगठन में विभाजन और असंतोष को जन्म दिया है। इसी के चलते बड़े लीडर सरेंडर कर रहे हैं। पुराने कमांडर मैदान छोड़ रहे, नए कैडर के पास नेतृत्व नहीं
नक्सल संगठन इस समय नेतृत्व संकट के दौर से गुजर रहा है। पुराने और प्रशिक्षित नेता लगातार मुख्यधारा में लौट रहे हैं, तो संगठन की कमान संभालने सक्षम नेतृत्व शेष नहीं है। स्थिति ये है कि जिन युवा कैडरों को भविष्य का चेहरा माना जा रहा था, उनकी न तो वैचारिक पकड़ पुराने नेतृत्व जैसी मजबूत है और न ही गुरिल्ला युद्ध की रणनीतिक समझ। संगठन में निर्णय लेने, संसाधनों के बंटवारे और अभियानों की योजना बनाने जैसी प्रक्रिया प्रभावित हो रही हैं। नतीजतन नए नक्सली कार्यकर्ता दिशा हीनता का सामना कर रहे हैं। हालिया वर्षों में बड़े सरेंडर और एनकाउंटर
1. नमबाला केशव: नक्सली संगठन का जनरल सेक्रेटरी और बड़े रणनीतिक नेता में से एक। उसे मई 2025 में नारायणपुर के अबूझमाड़ इलाके में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया।
2. मल्लोजुला वेणुगोपाल राव (भूपति उर्फ सोनू): नक्सल संगठन के इस वरिष्ठ नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य ने अक्टूबर 2025 में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 60 कैडरों के साथ सरेंडर किया। इसे वहां की सरकार ने नक्सलवाद के युग का अंत बताया था।
3. सुधाकर: बीजापुर इलाके में सक्रिय रहा। इस नक्सली लीडर को जून 2025 में सुरक्षा बलों ने एनकाउंटर में मार गिराया था।
4. शंकर राव: अप्रैल 2024 में कांकेर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में शंकर राव समेत 28 नक्सली मार गिराए गए थे। शंकर पर 25 लाख का इनाम था।
5. हिड़मा: दिसंबर 2025 में तेलंगाना में हिड़मा को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। हिड़मा नक्सलियों की इकलौती बटालियन का कमांडर रह चुका है।
6 .गणेश उइके: दिसंबर 2025 में ओडिशा में एक मुठभेड़ में गणेश उइके को मार गिराया गया। 2025 के 3 बड़े फोकस, जिनसे ढहा लाल किला…


