सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को अजमेर से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) वैक्सीनेशन का शुभारंभ करेंगे। हर साल देश में हजारों महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर से जान चली जाती है। HPV वैक्सीन इस कैंसर से बचाने में एक बड़ा सुरक्षा कवच माना जाता है। हजारों में कीमत होने के चलते यह वैक्सीन गरीब लोगों की पहुंच से दूर थी। अब राष्ट्रीय टीकाकरण में शामिल होने के कारण वैक्सीन मुफ्त में लगाई जाएगी। अभियान की शुरुआत के लिए वैक्सीन की 3 लाख 60 हजार डोज राजस्थान पहुंच चुकी है। यह वैक्सीन कब और किस उम्र की लड़कियों को लगाई जाएगी? वैक्सीन लगवाने के लिए कहां जाना होगा? सर्वाइकल कैंसर कितना घातक है? यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में कितनी कारगर है? इस स्टोरी में ऐसे ही सवालों के जवाब स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा और स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट के एक्सपर्ट डॉ. नैना अग्रवाल से जानेंगे…. सवाल : यह वैक्सीन किस उम्र की लड़कियों/महिलाओं को लगाई जाएगी? जवाब : फिलहाल यह वैक्सीन उन सभी लड़कियों को लगाई जाएगी, जिनकी उम्र 14 से 15 वर्ष के बीच है। यानि जिन लड़कियों ने अभी अपना 15वां जन्मदिन नहीं मनाया है, वे इस सरकारी अभियान का हिस्सा बन सकेंगी। वैक्सीन की एक खुराक लड़कियों के बाएं हाथ में ऊपर की तरफ लगाई जाएगी। सवाल : यह वैक्सीन कौन-कौन से सरकारी अस्पतालों में लगाई जाएगी? जवाब : शुरुआती 3 महीनों के लिए, यह वैक्सीन केवल उन केंद्रों पर दी जाएगी, जहां आपातकालीन सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध है। सवाल : वैक्सीन कैसे काम करती है और क्यों ये जरूरी है?
जवाब : सर्वाइकल कैंसर HPV वायरस से होता है। वैक्सीन इन घातक वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनाती है। यदि HPV वायरस कभी शरीर में प्रवेश करता भी है, तो वैक्सीन के कारण बनी एंटीबॉडी उसे कैंसर में बदलने से रोक देते हैं। भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं। करीब 75 हजार से 80 हजार महिलाएं हर साल अपनी जान गंवा देती हैं। पूरी दुनिया में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली कुल मौतों का 20 से 22 फीसदी हिस्सा अकेले भारत में है। इसके फैलाव को रोकने के लिए यह वैक्सीन बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक, यह वैक्सीन केवल सर्वाइकल कैंसर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शरीर को कई अन्य बीमारियों से भी सुरक्षा प्रदान करती है। सवाल : किस उम्र में और कितनी डोज इसकी लगवानी चाहिए?
जवाब : सरकारी अभियान में यह वैक्सीन 14 से 15 साल के बीच की लड़कियों के लिए है। विशेषज्ञों के अनुसार 9 से 14 साल की आयु वर्ग की लड़कियों को भी वैक्सीन लगाई जा सकती है। इसकी 2 डोज लगाई जाती है। सवाल : प्राइवेट सेक्टर में कितनी महंगी है वैक्सीन?
जवाब : एचपीवी वैक्सीन बाजार में फार्मा शॉप पर पहले से मौजूद है। इसकी कीमत तीन हजार से लेकर पांच हजार रुपए के बीच है। अब अभियान में इसे सरकारी अस्पतालों में निशुल्क लगाया जाएगा।
सवाल : सर्वाइकल कैंसर का कब पता चलता है, कौन से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?
जवाब : सबसे खतरनाक बात यह है कि सर्वाइकल कैंसर के लक्षण तब तक नहीं दिखते जब तक कि यह एडवांस स्टेज में न पहुंच जाए। ऐसे में इस कैंसर के लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पीरियड्स के अलावा या मेनोपॉज (मासिक धर्म बंद होने) के बाद अचानक ब्लीडिंग होना। शारीरिक संबंध के बाद रक्तस्राव या तेज दर्द। पेट के निचले हिस्से में लगातार बना रहने वाला दर्द। वेजाइना से असामान्य और दुर्गंधयुक्त डिस्चार्ज। सवाल : क्या वैक्सीन के बाद खतरा टल जाता है?
जवाब : टीका लगवाने के बाद भी पैप स्मीयर टेस्ट और नियमित चेकअप जरूरी है। क्योंकि वैक्सीन 90 फीसदी तक HPV कैंसर के वायरस से तो बचाती है। लेकिन 10 फीसदी मामलों में ऐसा भी हो सकता है कि वायरस वैक्सीन के दायरे से बाहर हो। वैक्सीन को महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच माना जा रहा है। जरूरी है चेकअप कराते रहें। देश में दूसरा सबसे आम कैंसर है सर्वाइकल
सर्वाइकल कैंसर भारत में दूसरा सबसे आम कैंसर है। हर साल लगभग डेढ़ लाख महिलाओं में इसका पता चलता है। इसकी रोकथाम के लिए सबसे कारगर उपाय एचपीवी के खिलाफ टीकाकरण है। यही कारण है कि देशभर में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी वैक्सीनेशन का शुभारंभ किया जा रहा है। अजमेर के कायड़ में दिलवाड़ा गांव को सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण केंद्र के रूप में चुना गया है।
राजस्थान पहुंची 3 लाख 60 हजार डोज
राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के पास एचपीवी वैक्सीन के 3 लाख 60 हजार डोज पहुंच चुके हैं। पीएम मोदी के 28 फरवरी को इस अभियान के शुरू करने के साथ ही अलग-अलग सेंटर्स पर डोज लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारियां कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि राजस्थान में कैंसर रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। सरकारी क्षेत्र के अलावा प्राइवेट क्षेत्र में कैंसर रोगियों के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।


