सर्व सेवा संघ का दो दिवसीय 91वां अधिवेशन अनूपपुर में आज से प्रारम्भ
अनूपपुर। सर्व सेवा संघ का दो दिवसीय कार्यक्रम शुरू हो गया है, मुख्य अतिथि, विशिष्ट गांधी चिंतक, गांधी विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी करने वाले तुषार गांधीजी, मंचासीन स्वागत समिति के अध्यक्ष, गणमान्य, सर्व सेवा संघ के मंत्री मंडल, ट्रस्टीज, कार्यकारी सदस्यगण, देशभर के प्रदेश सर्वोदय मंडलों के प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्षों, मंत्री, लोकसेवकों, सर्वोदय मित्रों, साथी सहमना संगठनों के प्रतिनिधिगण, अधिवेशन स्वागत समिति के अन्य सदस्यगण, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथी गण और उपस्थित बहनों, भाईयों और सुधि मंडली आनेवाले क्रिसमस दिवस तथा 2025 नये साल के लिये शुभेच्छा एवं हार्दिक शुभकामनाएं दी। अध्यक्ष ने सर्व सेवा संघ का 91वां अधिवेशन में सभी का स्वागत करते हुए स्वागत किया अध्यक्ष ने बताया की पिछले साल 7 नवम्बर 2023 को सेवाग्राम (महाराष्ट्र) अधिवेशन के दौरान उपस्थित सभी ने दूसरे अवधि फिर से 3 साल के लिये सर्वसम्मति से उनपर सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी। यद्यपि चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से जाना पड़ा, लेकिन मेरे मन में पूराने श्मनावश् पद्धति सर्वोदय के लिये आज भी उचित लग रही है। इसलिये चुनाव के 2 दिन पहले 5 नवम्बर, 2023 को संघ के दफ्तर में जब मिले, चार्ली चापलिन का एक कमेंट्स याद आता है, होने अध्यक्ष के नाते दूसरे अवधि में एक साल पूरा हो गया। हमारे हर साथियों के भरपूर सहयोग से और आप सभी के सहयोग से हर मुसीबतों का सामना करने में शक्ति मिली।
अध्यक्ष ने बताया की गांधीजी ने एक शोषणहीन, समतामूलक, अहिंस, स्वावलंबी समाज की कल्पना की थी। लेकिन सवाल है शोषण नहीं होगा, असमानता नहीं रहेगा तो कुछ लोगों के हाथ में ढेर सारे पूंजी आयेगी कहां से? शोषण नहीं होगा तो सम्पदों का केन्द्रीकरण होगा कैसे? कुछ लोगों को पूंजीपति, अमीर बनाना हो तो काफी संख्या से लोगों को गरीब तो बनना ही पड़ेगा। पूंजीवादी व्यवस्था की आलोचना क्यों करते है, कारण यह व्यवस्था शोषण, अविचार, अन्याय, क्रूरता, बर्बरता को बढ़ावा देते है। पूंजीपतियों को अन्याय तरीके से पूंजी बढाने में देश की सरकार किसान लोगों से जमीन छीनकर यहीं पूंजीपतियों को तोहफा के हिसाब से दी जा रही है। सरकार ऐसे उद्योगपतियों को साथ दे रहे है कि जिनके बारे में कोई विदेशी राष्ट्रों में फिरौती देने के मामले में दोषी ठहराया है। सर्व सेवा संघ द्वारा 100 दिन का जो सत्याग्रह चला जिसकी सिरोनाम न्याय की दीप जलाये, ये सिरोनाम के विषय में जनता के बीच में, हालांकि हमारे कुछ सर्वोदय साथियों के बीच में भी थोड़ी सी गलतफहमी दिखायी दिया। उन लोगों के मन में यह भी लगा कि सर्व सेवा संघ (साधना केंद्र), वाराणसी की खरीद की गयी जमीन पर अन्याय तरीके से सरकार द्वारा, रेल विभाग द्वारा जबरन दखल की गयी हेरिटेज भवनों को बुल्डोज किया गया। इस अन्याय, अविचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिये और हमें न्याय मिले, जमीन वापस मिले, मुआवजा मिले इसलिये यह 100 दिन का सत्याग्रह चलाया था। इस विषय पर थोडा साफ करना चाहता हूं। लोग सत्याग्रह के माध्यम से न्याय की मांग कर रहे है। और भी कई ढेर सारे सवाल हो सकते है, यह सब विषय लेकर जनता के बीच में जाना और जागृत करना हम सबकी जिम्मेवारी है। उस हिसाब से देखा जाय तो इस 100 दिन का सत्याग्रह कही-न-कही देशभर में सर्वोदय कार्यकर्ताओं के बीच में जोश पैदा करने में, आम जनता का ध्यान आकर्षण करने में सफल रहा है। यह केवल सर्व सेवा संघ सत्याग्रह चलाया है, यह बात सही नहीं है। जरुर इसको चलाने में सर्व सेवा संघ की मूल भूमिका रही। लेकिन साथ-ही-साथ लोकतंत्र में विश्वास रखनेवाले, संविधान पर विश्वास रखनेवाले, धर्मनिरपेक्षता पर विश्वास रखनेवाले, झूठ के खिलाफ, विद्वेष भावना के खिलाफ, कॉर्पोरेट प्रभुत्ववाद के खिलाफ लडनेवाले सत्य और न्याय के रास्ते पर चलनेवाले कोई व्यक्ति, साथी, सममनोभावी संगठनों ने भरपूर साथ दिया। किसका नाम लूं, कोई नाम छुट जायेगा तो अच्छा नहीं लगेगा। तो भी जो याद है उन संस्थाओं के नाम ले रहे हैं। रहे हैं। कोई नाम छूट जाने से मुझे क्षमा कीजियेगा। लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान, राष्ट्रीय लोकसमिति, लोकसमिति नागेपुर, लोकचेतना समिति, जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी, राष्ट्रीय युवा संगठन, उत्कल गांधी स्मारक निधि, गांधी शांति प्रतिष्ठान ओडिशा, वनवासी सेवा आश्रम, जे.पी. फाउंडेशन, एन.ए.पी.एम., बिहारी महिला कामगार मजदुर संगठन, बुनकर साझा संघ, जमीन मकान बचाव संयुक्त मोर्चा, समग्र सेवा संघ, संयुक्त किसान मोर्चा आजमगढ़, छात्र युवा संघर्ष वाहिनी, पूर्वाचल बहुजन मोर्चा, सर्व सेवा संघ प्रकाशन, मजदुर किसान परिषद, आशा ट्रस्ट, कृष्णमूर्ति फाउंडेशन, सभी प्रदेश सर्वोदय मंडलों के साथी, जहां सर्वोदय मंडल नहीं वैसे कोई प्रदेशों के साथी उपवास में भाग लिये। हम लोगों का लक्ष्य था कि 100 दिन के सत्याग्रह में एक-एक दिन देश के कई प्रान्तों से एक जिले के प्रतिनिधि उपवास में भाग लेंगे। आखिर में हम सबको याद रखना चाहिए कि गांधीजी को केवल स्मरण नहीं करना, अनुसरण करने की जरुरत है।


