सर्व हिंदू समाज का सम्मेलन संपन्न:भव्य कलश यात्रा और ओजस्वी विचारों से एकता का संदेश

नगर में सर्व हिंदू समाज के तत्वावधान में रविवार को एक हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य समाज में एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध की भावना को बढ़ावा देना था। लोकाशाह नगर, विनोद नगर, सी.एस. लोढ़ा कॉलोनी, भाटी कॉलोनी, समता नगर, परमेश्वर नगर, पन्ना कॉलोनी, लुहार बस्ती, भारती नगर, राम नगर–2 और नानेश नगर सहित आसपास की बस्तियों के हिंदू समाज ने सामूहिक रूप से इसका आयोजन किया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी, बुद्धिजीवी, महिलाएं और युवा वर्ग मौजूद रहे। सम्मेलन की शुरुआत एक भव्य कलश यात्रा से हुई। यह कलश यात्रा लोकाशाह नगर स्थित हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर विभिन्न बस्तियों से गुजरी और मां आशापुरा माता मंदिर पर समाप्त हुई। यात्रा में महिलाएं सिर पर कलश धारण किए हुए थीं, जबकि युवक-युवतियां भगवा ध्वज लेकर चल रहे थे। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की धुन पर जयघोष करते हुए शामिल हुए। कलश यात्रा के बाद दीप प्रज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी संस्कृति, संस्कार, परंपरा और आपसी एकता में निहित है। उन्होंने जोर दिया कि एक संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है।

सम्मेलन में राजवीर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदू समाज की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल शासन का नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। महिला वक्ता निधि चौहान ने अपने उद्बोधन में कहा कि नारी के जागृत होने से परिवार, समाज और राष्ट्र स्वतः जागृत होता है। मुख्य वक्ता डॉ. क्षमशील गुप्त ने दशरथ मांझी और सावित्री जैसे उदाहरणों के माध्यम से सामान्य व्यक्ति की असाधारण संकल्प शक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। संत महामंडलेश्वर डॉ. देवऋषि दास महाराज ने अपने आशीर्वचनों में सत्य, सेवा, सद्भाव और संस्कारों को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन रूपेश कोठारी ने किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष कृष्णचंद्र लड्ढा ने सभी कार्यकर्ताओं, प्रशासन, मीडिया और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। अतिथियों का पारंपरिक साफा और दुपट्टा पहनाकर सम्मान किया गया। सम्मेलन के समापन पर प्रसादी-भोजन की व्यवस्था भी की गई थी।

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