भास्कर संवाददाता। डूंगरपुर जिला अस्पताल में कई सुविधाएं भी बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन चिकित्सकीय सुविधाओं में हम अभी भी बेहद पिछड़े हुए हैं। हालात ये है कि यदि कोई हादसे में घायल हो और उसके सिर पर चोट लगे तो उसे रेफर करना ही एक मात्र इलाज है । क्योंकि यहां न्यूरो सर्जन नियुक्त नहीं है। जबकि पद स्वीकृत है। पिछले बारह दिनों में जिले के बड़े हरिदेव जोशी अस्पताल में 13 गंभीर रोगी सिर पर चोट लगने से पहुंचे। सभी को रेफर करना पड़ा। मरीज भी दूसरे अस्पताल तक पहुंच पाए या नहीं, इसका अस्पताल प्रबंधन के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि सरकार ने सभी हाइवे और जिला अस्पतालों में अलग से ट्रोमा सेंटर बनाए हैं, ताकि हादसे में आने वाले घायलों को समय से इलाज मिल सके और उनकी जिंदगी बच सके। इन ट्रोमा सेंटर पर आर्थो, न्यूरोसर्जन, मेडिकल ऑफिसर, अलग नर्सिंग स्टाफ, एक्स-रे, सिटी स्कैन और वेंटीलेटर की सुविधा होने का नियम है। जिला अस्पताल में 6 सर्जन भी है। लेकिन जहां यह सुविधा है। परन्तु न्यूरो सर्जन के अभाव में अघोषित रूप से सेकंडरी लेवल ट्रोमा सेंटर नाम दे दिया गया है। मेडिकल कॉलेज के पूरी तरह से शुरू होने के बाद भी न्यूरो सर्जन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इलाज नहीं मिलने से गंभीर मरीजों को उदयपुर और अहमदाबाद जाना पड़ता है। अस्पताल अधीक्षक महेन्द्र डामोर ने बताया कि सुपर स्पेशीलिटी होने पर ही न्यूरो के पद आते हैं। यह इमरजेंसी वार्ड है। ट्रोमा के पेशेंट आते है। उसमें संबधित विभाग के पास भेज दिया जाता है। हेड इनज्यूरी में यदि पेशेंट को अंदर की चोट है तो उसको रेफर किया जाता है।


