करौली में राजस्थान सहकारी कर्मचारियों में लंबित मांगों को लेकर असंतोष बढ़ गया है। विभागीय स्तर पर बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद ठोस आदेश जारी न होने से नाराज कर्मचारियों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाया है। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने उप रजिस्ट्रार के माध्यम से सहकारिता मंत्री को ज्ञापन सौंपा है। संयुक्त संघर्ष समिति ने अपनी न्यायोचित मांगों के समर्थन में विभाग को लंबे समय से अवगत कराया था। समिति ने पूर्व में 6 अगस्त 2025 को मांग पत्र प्रेषित किया था, जिस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद समिति द्वारा औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 22 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत कानूनी नोटिस जारी कर लोकतांत्रिक आंदोलन की घोषणा की गई थी। इसके बाद विभागीय स्तर पर 29 सितंबर, 1 अक्टूबर, 3 अक्टूबर और 6 अक्टूबर 2025 को वार्ताएं हुईं। इन वार्ताओं में ठोस आश्वासन दिए गए और कैडर अथॉरिटी के गठन को लेकर उच्च स्तरीय प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। इन आश्वासनों को ध्यान में रखते हुए संघर्ष समिति ने जनहित एवं किसान हितों को सर्वोपरि मानते हुए 7 अक्टूबर 2025 से आंदोलन स्थगित कर दिया था, जिसे आगे चलकर 7 नवंबर एवं 15 दिसंबर 2025 तक चरणबद्ध रूप से स्थगित रखा गया। संघर्ष समिति का कहना है कि कैडर अथॉरिटी के प्रारूप को लेकर सुझाव प्रस्तुत किए जाने के बावजूद अब तक केवल कागजी औपचारिकताएं ही पूरी हुई हैं। जमीनी स्तर पर कोई भी ठोस आदेश जारी नहीं किया गया है। प्रशासनिक शिथिलता एवं वायदा खिलाफी के चलते कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। इसी रोष के परिणामस्वरूप संघर्ष समिति ने सर्वसम्मति से आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की है। समिति ने उप रजिस्ट्रार के माध्यम से सहकारिता मंत्री को फिर से ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए और ठोस आदेश जारी किए जाएं, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


