निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच सहजानंद चौक के पास स्थित आवास बोर्ड की दीवार मानो सभी दलों के लिए प्रचार का साझा मंच बन गई है। हर इंच पर किसी न किसी प्रत्याशी या दल का पोस्टर चिपका नजर आ रहा है। रंग-बिरंगे कागजों पर किसी ने विकास का वादा किया है, तो किसी ने सफाई और पारदर्शिता का। पर सवाल यह उठता है कि स्वच्छता का संदेश देने वाले नेता खुद कितने सजग हैं? जो नेता गली-गली घूम-घूम कर स्वच्छ रांची बनाने का वादा कर रहे हैं, वही एक साफ दीवार को गंदा कर रहे हैं। जबकि नियम है कि रेलवे स्टेशन, सरकारी दफ्तर, सरकारी अस्पताल, स्कूल, पुल और अन्य सार्वजनिक स्थानों की दीवारों को विरूपित करना (गंदा करना/ पोस्टर चिपकाना) प्रतिबंधित है। ऐसे में इन नेताओं पर जनता कितना भरोसा करे? सरकारी दीवार पर पोस्टर लगाने का आरोप : केंद्रीय सरना समिति ने सोमवित माजी के खिलाफ की शिकायत वार्ड-18 से पार्षद प्रत्याशी सोमवित माजी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगा है। केंद्रीय सरना समिति ने राज्य निर्वाचन आयोग से इसकी लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि प्रत्याशी ने सरकारी पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, लाइन टैंक रोड स्थित पुलिस क्लब के आसपास की दीवारों पर चुनाव प्रचार के पोस्टर लगाए हैं, जो आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है। समिति का कहना है कि सरकारी संपत्ति पर बिना अनुमति प्रचार सामग्री लगाना नियमों के विरुद्ध है। केंद्रीय सरना समिति ने राज्य निर्वाचन आयोग से मामले की जांच कर वार्ड-18 के प्रत्याशी सोमवित माजी पर आचार संहिता के तहत विधिसम्मत कार्रवाई करने की मांग की है।


