पांच साल से प्रदेश के 600 कॉलेजों में विद्या संबल योजना के तहत लगे करीब ढाई हजार सहायक आचार्यों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने टीचिंग एसोसिएट के पदों पर संविदा भर्ती की तैयारी की है। भर्ती कर्मचारी चयन बोर्ड के जरिए होगी। ऐसे में उनको लग रहा है कि विद्या संबल योजना को खत्म करने की तैयारी है। इससे वे बेरोजगार हो जाएंगे। सोमवार को प्रदेशभर के सहायक आचार्य शहीद स्मारक पर एकत्रित हुए। सहायक आचार्य डॉ. रामसिंह सामोता ने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन 2018 के मानकों के अनुरूप चयन कर अस्थाई सहायक आचार्य के पद पर नियुक्ति दी गई थी। इसके तहत 100 अंकों का एपीआई स्कोर तैयार होता है, जिनमें पीएचडी, नेट, सेट, जेआरएफ, 6 अंक का रिसर्च पेपर, 10 अंकों का अनुभव, यूजी- पीजी प्राप्तांक, राज्य स्तरीय- राष्ट्रीय स्तरीय पुरस्कार आधार बनते हैं। संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र सिंह यादव का कहना है कि नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। राज्य सरकार हमें हटाकर 5 वर्ष के लिए अस्थाई भर्ती कर रही है। विद्या संबल के तहत लगे आचार्यों को हटाकर बेरोजगार कर दिया जाएगा। प्रदेश महामंत्री डॉ. उपदेश शर्मा का कहना है कि राजस्थान पहला राज्य होगा जहां मेहनत करने वालों को इस तरह से बेइज्जत किया जा रहा है।


