सहारनपुर में सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी:दो साल में पकड़े गए 10 से ज्यादा डॉक्टर, बाबू, अमीन और दरोगा

यूपी सरकार की छवि को सरकारी कर्मचारी खराब करने लगातार लगे हुए है। जिसकी वजह से पिछले दो साल में 10 सरकारी कर्मचारियों को एंटी करप्शन और विजीलेंस की टीम के हथे चढ़े हैं। जिसमें 3 लेखपाल, 2 सरकारी डॉक्टर, 2 दरोगा, 2 प्रधान लिपिक (बाबू) और एक होमगार्ड शामिल है। वहीं दो संविदा कर्मचारी भी शामिल है। रिश्वतखोरी का अड्‌डा बना सहारनपुर
दो साल से सरकारी कर्मचारी अपनी छोटी-मोटी डिमांड को पूरा करने लिए सरकार की छवि पर धब्बा लगाने में लगे हैं। किसान, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, आश्रितों के अलावा चतुर्थ कर्मचारियों के काम के नाम पर छोटी-मोटी रिश्वत मांगी जा रही है। अपने ही काम के लिए जरूरतमंद लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। समाधान दिवस तक में शिकायत करने के बाद भी कोई निपटारा नहीं कराया जाता है। ऐसे में दुखी होकर पीड़ित लोगों को एंटी करप्शन की चौखट पर न्याय के लिए जाना पड़ता है। 20 हजार की रिश्वत लेते हुए दरोगा अरेस्ट
20 दिसंबर 2024 को सरकारी कर्मचारी टेशन लाल का एफआईआर से नाम निकाले को लेकर दरोगा जसवीर सिंह एंटी करप्शन के हथे चढ़ गया। टेशन लाल से 35 हजार की डिमांड की गई थी। 5 हजार रुपए पहले दे चुका था। लेकिन 25 हजार में नाम निकालने की बात हुई थी। जिला चकबंदी अधिकारी हुआ था अरेस्ट
सितंबर माह में देवबंद से विजीलेंस मेरठ की टीम ने एक जिला चकबंदी अधिकारी धर्मदेव को 50 हजार की रिश्वत लेते हुए अरेस्ट किया था। गांव बनेड़ा खास के रहने वाले किसान मोहर्रम अली से भूमिधरी के आदेश कराने के नाम पर मांगी थी। ऑनलाइन सिस्टम भी फेल
सरकार ने विभागों से फर्जीवाड़ा और रिश्वतखोरी खत्म करने के लिए ऑनलाइन ही प्रत्येक विभाग की साइट बनाई हुई है। सरकारी विभागों की कुछ साइटों पर आवेदन करने पर किसी के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं। तुरंत लोगों की समस्याओं को निस्तारण हो जाता है। लेकिन कुछ विभाग ऐसे हैं, जिनके लिए व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट लगवानी पड़ती है। जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी जैसे बीज पनपने लगते हैं। सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी किसानों से होती है। खतौनी चढ़ाने और मुआवजे के नाम पर। दो साल में यह पकड़े गए घूसखोर… होमगार्ड बाबू हुआ था अरेस्ट 4 मई 2024 को एंटी करप्शन की टीम ने होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय में तैनात क्लर्क दिनेश कुमार को 1.50 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए अरेस्ट किया था। मामले में मंडलीय कमांडेंट होमगार्ड अजय कुमार पांडेय के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ था। मुजफ्फरनगर में तैनात अनिल कुमार को बर्खास्त कर दिया गया था। उसकी बहाली को लेकर रिश्वत ली थी। दो लाख रुपए मांगे थे, लेकिन डेढ़ लाख में सौदा हुआ था। 10 हजार की रिश्वत लेते हुए जेई अरेस्ट
4 जुलाई 2024 को एंटी करप्शन की टीम ने किसान कमल कुमार की शिकायत पर बिजली विभाग के जेई सुमित को 10 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों अरेस्ट किया था। किसान के ट्यूबवैल के कनेक्शन के ऑनलाइन आवेदन को पास करने के लिए रिश्वत मांगी थी। जेई बड़गांव के जडौदा पांडा बिजली घर में था। सरकारी आवास पर मिले थे 21 लाख
3 अगस्त 2024 को मेरठ विजीलेंस की टीम ने एक डॉक्टर और संविदाकर्मी एक अकाउंटेट को अरेस्ट किया था। पुवारंका सीएचसी में आयुष्मान आरोग्य मंदिर के संविदा कर्मियों से प्रोत्साहन राशि और वेतन पर 10 प्रतिशत की कमीशन लेने की शिकायत हुई थी। 92, 450 रुपए की रिश्वत के साथ रंगे हाथ अरेस्ट किया था। डॉक्टर के सरकारी आवास पर 21 लाख रुपए भी अलग बैग में मिले थे। अमीन और कंप्यूटर ऑपरेटर पकड़ा
सहारनपुर एंटी करप्शन की टीम ने 8 जनवरी 2024 को कलेक्ट्रेट परिसर से अमीन ऋषिपाल और कंप्यूटर ऑपरेटर सुमित को अरेस्ट किया। आरोपी अमीन भूमि अध्यापति अधिकारी (SLO) में तैनात है और कंप्यूटर ऑपरेटर सुमित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में संविदा का कर्मचारी है। थाना तीतरों के गांव बीराखेड़ी के रहने वाले देव कमल की शिकायत पर इन्हें अरेस्ट किया गया है। आरोप है कि पेड़ के मुआवजा देने के 15 हजार रुपए मांग रहे थे। दरोगा ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के मांगे थे 50 हजार
11 अगस्त 2023 को एससी-एसटी एक्ट के मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए नकुड़ सीओ के कार्यालय में तैनात दरोगा (रीडर) हरपाल को रंगे हाथ भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) की सहारनपुर व मेरठ टीम ने गिरफ्तार किया। आरोपी ने 80 हजार रुपए मांगे थे। आरोपी के खिलाफ कोतवाली सदर बाजार में रिपोर्ट दर्ज की गई। गिरफ्तार होने पर दरोगा ने सीओ पर गंभीर आरोप लगाए थे। सीओ को मुख्य आरोपी एंटी करप्शन ने बनाया था। लेकिन सीओ कोर्ट से स्टे लेकर आ गए है। फिलहाल पुलिस लाइन में बैठ रहे हैं। किसान की जमीन से अवैध कब्जा छुड़ाने की लेखपाल ने मांगी थी रिश्वत
कलेक्ट्रेट परिसर की सदर तहसील से 21 फरवरी 2021 को एंटी करप्शन की टीम ने एक लेखपाल नेत्रपाल को गिरफ्तार किया था। गांव दतौली मुगल के किसान मोहब्बत अली से चकरोड का सर्वे करने और दूसरे व्यक्ति द्वारा कब्जा छुड़वाने की एवज में 5 हजार रुपए मांगे गए थे। किसान का आरोप था कि उसने कई बार इसकी शिकायत समाधान दिवस में भी की। लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। दाखिल खारिज के किसान से मांगी थी रिश्वत
बेहट तहसील से 26 नवंबर 2021 को एंटी करप्शन टीम ने लेखपाल रियासत अली को गिरफ्तार किया था। आरोपी लेखपाल ने किसान से दाखिल खारिज के नाम पर पांच हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। गांव रंड़ौल के भोपाल चौहान ने 23 नवंबर को एंटी करप्शन की मेरठ यूनिट से शिकायत की थी। आरोप था कि लेखपाल रियासत अली उसके द्वारा खरीदी गई भूमि के दाखिल खारिज के नाम पर 10 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है। चिकित्सा अधीक्षक पर 9 हजार रुपए मांगने का आरोप
बेहट सीएचसी से 6 जनवरी 2023 को मेरठ एंटी करप्शन की टीम ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ.नितिन कंडवाल को 9 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। विभाग की ही एक सीएचओ संगीता देवी से रिश्वत मांगने का आरोप है। सीएचओ सलेमपुर गदा स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में तैनात है। सीएचओ को कार्य के आधार पर 6 महीने का पीडीआई मिला था। चिकित्सा अधीक्षक डॉ.नितिन कंडवाल पर कमीशन के नौ हजार रुपए मांगने का आरोप लगाया था। सीएचओ ने एंटी करप्शन की टीम से मेरठ में इसकी शिकायत की थी। टीम ने उन्हें उनके ऑफिस में रिश्वत लेकर रंगे हाथ पकड़ लिया। टीम ने उनके हाथ पानी में डलवाए पानी का रंग बदल गया था। एंटी करप्शन की टीम चिकित्सक को अपने साथ मेरठ ले गई थी। प्रधान लिपिक और होमगार्ड हुआ था अरेस्ट
सहारनपुर के कोषागार से 12 जनवरी 2023 एंटी करप्शन की टीम ने प्रधान लिपिक गुरु प्रताप और होमगार्ड रहीस को तीन हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। मुजफ्फरनगर के खतौली के रहने वाली शबनम के पिता सिराजुद्दीन की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हुई थी। वह नगर पालिका में कार्यरत थे। शबनम अपने भाई मेहराज के साथ सहारनपुर में पिछले कई माह से चक्कर काट रही थी। उनसे पेंशन की फाइल पास करने के तीन हजार रुपए मांगे जा रहे थे। तंग आकर युवती ने एंटी करप्शन में शिकायत की।

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