इंदौर सहकारी दुग्ध संघ (सांची) में व्याप्त अव्यवस्थाओं और दुग्ध उत्पादक किसानों के हितों की अनदेखी को लेकर संघ के पूर्व अध्यक्ष मोती सिंह पटेल ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो दुग्ध उत्पादकों को साथ लेकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। मोती सिंह पटेल ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से इंदौर दुग्ध संघ सहित प्रदेश के सभी दुग्ध संघों का संचालन राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा किया जा रहा है। एनडीडीबी के आने के बाद समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। इससे पहले संघ का संचालन निर्वाचित संचालक मंडल द्वारा किया जा रहा था। इसके तहत दुग्ध उत्पादक किसानों को हर वर्ष दूध विक्रय पर बोनस दिया जाता था, लेकिन NDDB के संचालन में आने के बाद यह बोनस बंद कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुग्ध संघ की अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। 15 किलो घी के केन का भाव जीएसटी घटने के बाद दो बार बढ़ाया गया, इसके बावजूद लगभग एक वर्ष से 15 किलो का केन बाजार में उपलब्ध नहीं है। वहीं दुग्ध उत्पादक किसानों के दूध क्रय रेट घटा दिए गए हैं, जबकि उपभोक्ताओं के लिए विक्रय दरें बढ़ा दी गई हैं। स्थिति यह है कि निजी व्यापारी किसानों से अधिक कीमत पर दूध खरीद रहे हैं। पटेल ने चेतावनी दी कि यदि दुग्ध संघ की व्यवस्थाएं समय रहते नहीं सुधारी गईं, तो संघ जल्द ही घाटे में चला जाएगा और निजी डेरी व्यापारी बाजार में मनमानी करने लगेंगे, जिससे किसानों को और अधिक नुकसान होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इंदौर दुग्ध संघ का संचालन आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे है, जिन्हें समय पर वेतन तक नहीं मिल रहा है। पशुआहार की गुणवत्ता खराब हो गई है और डेरी उत्पादों की गुणवत्ता में गिरावट के चलते बिक्री में भी भारी कमी आई है। मोती सिंह पटेल ने दुग्ध उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा करने और दुग्ध संघ में व्याप्त अव्यवस्थाओं को तत्काल दूर करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में दुग्ध उत्पादक किसानों को साथ लेकर आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन की तैयारी के तहत उन्होंने दुग्ध उत्पादक किसानों और संबंधित लोगों से अपील की है कि वे एकजुट होकर इस आंदोलन में शामिल हों और अपने अधिकारों व हितों की रक्षा करें।


