साइबर फ्राड के बढ़ते मामलों के बावजूद प्रदेश में बैंकों का रवैया चौंकाने वाला है। प्रदेश की साइबर क्राइम पुलिस शाखा द्वारा एक ही ब्रांच में सैकड़ों फर्जी (म्यूल) खाताें की जानकारी देने के बावजूद न तो काेई ठाेस कार्रवाई नहीं की गई और ना ही खाते बंद किए। यह जानकारी राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की 162वीं बैठक में चर्चा के दाैरान सामने आई। बैठक में राज्य के गृह विभाग और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक साइबर अपराध ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों की जांच में बैंकों से पूरा सहयोग नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। प्रदेश में डिजिटलाइजेशन के साथ साइबर अपराध भी बढ़े यहां तक कि अधिकांश बैंक शाखाओं में राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 प्रदर्शित करने वाले बाेर्ड भी नहीं है, जबकि इस हेल्पलाइन पर सूचना देते ही संबंधित बैंक खाताें पर त्वरित कार्रवाई कर ही सकती है, लेकिन नंबर प्रदर्शित नहीं हाेने से ग्राहकाें काे इसकी जानकारी ही नहीं है और वे शिकायत ही नहीं कर पाते। बैठक में राज्य के संयुक्त शासन सचिव, गृह विभाग ने बैंक अधिकारियों से राजस्थान पुलिस को जांच और 161 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज कराने में सहयोग करने की अपील की। उधर, राजस्थान के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक साइबर अपराध ने कहा कि प्रदेश में डिजिटलाइजेशन के साथ साइबर अपराध भी बढ़े हैं। ऐसे में राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपाेर्ट करते ही बैंक खाताें में त्वरित हाेल्ड की प्रक्रिया ऑटोमेटिक होनी चाहिए। इससे फ्राड राशि काे अन्य खाताें में ट्रांसफर करने से राेका जा सकता है। 1930 हेल्पलाइन पर हर बैंक में एक अधिकारी या कर्मचारी काे समन्वय बनाने के सुझाव के साथ नाेडल अधिकारी नियुक्त करने का आग्रह किया है, जाे 24 घंटे साताें दिन शिकायतों पर कार्यवाही के लिए जवाबदेह हाे। ये सुझाव भी दिए सभी बैंकों को पत्र लिखा है एसएलबीसी एजीएम अनुज अवस्थी ने कहा कि हमने सभी बैंकों को बैठक में उठाए गए मुद्दाें को लेकर पत्र भेज दिया है, ताकि साइबर फ्राड रोकने के लिए बताए गए सुझावों को अमल में लाया जा सके।


